काठमांडू। : नेपाल में तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में बुधवार सुबह आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक आए तेज जलप्रवाह से गांव, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। नेपाल में अब तक कम से कम 162 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 844 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 133 से अधिक भारतीय नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
35 टन राहत सामग्री लेकर आज रवाना होगा IAF का C-17
भारत ने नेपाल में राहत अभियान तेज कर दिया है। भारतीय वायुसेना का C-17 विमान 35 टन से अधिक राहत सामग्री लेकर गुरुवार सुबह 9 बजे दिल्ली के हिंडन एयरबेस से नेपाल के लिए रवाना होगा। इससे पहले बुधवार को भारत ने 10 टन राहत सामग्री लेकर पहला विमान नेपाल भेजा था।
नेपाल में फंसे भारतीयों की मदद के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के साथ तमिलनाडु, केरल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और ओडिशा समेत कई राज्यों ने हेल्पलाइन और सहायता तंत्र शुरू किए हैं। ओडिशा सरकार ने लापता भारतीयों के परिजनों की मदद के लिए विशेष कंट्रोल रूम भी बनाया है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु भी लापता
बाढ़ के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल गए 130 से अधिक भारतीयों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कम से कम 59 श्रद्धालु एक निजी टूर एजेंसी के माध्यम से यात्रा पर गए थे। संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण प्रभावित भारतीय नागरिकों की स्थिति के बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं मिल सकी है। कई भारतीयों के नेपाल में फंसे होने की भी सूचना है।
पश्चिम बंगाल के 32 और तमिलनाडु के 37 पर्यटकों के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है। नेपाल के पर्यटन अधिकारियों के अनुसार, कुल 579 पर्यटकों के लापता होने की खबर है, जिनमें 400 से अधिक विदेशी नागरिक हैं। इनमें 47 अमेरिकी, 34 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 24 कनाडाई नागरिक शामिल हैं।
तिब्बत में भी 558 लोग लापता
चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, बाढ़ से तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में 558 लोग लापता हुए हैं। इनमें 260 विदेशी नागरिक बताए गए हैं। चीन में इस आपदा से अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) ने कहा है कि नेपाल और तिब्बत में दर्ज की गई भूकंप जैसी हलचल वास्तव में ग्लेशियर के ढहने और मलबे के तेज बहाव से जुड़ी थी। एजेंसी के मुताबिक, ग्लेशियर के ढहने के बाद निचले इलाकों में पानी और मलबे के तेज बहाव ने भारी तबाही मचाई।
19 पुल और 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त
नेपाल में तबाही का सबसे ज्यादा असर रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में देखा गया है। तेज बहाव में कई बस्तियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। शुरुआती आकलन के मुताबिक कम से कम 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी है।
बाढ़ का पानी आगे चलकर भारत के बिहार तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में सीमावर्ती इलाकों में भी प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। दूरदराज के प्रभावित क्षेत्रों में सड़क और संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण बचाव दलों के सामने लापता लोगों तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।








