नेपाल में जलप्रलय का कहर, 675 के करीब मौतें; हजारों अब भी लापता

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डेस्क : तिब्बत-नेपाल सीमा पर आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल में तबाही का मंजर लगातार गहराता जा रहा है। हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर करीब 675 पहुंच गई है, जबकि 2,500 से अधिक लोगों के अब भी लापता होने की सूचना है। इनमें 700 से अधिक विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए नेपाल, भारत और चीन के इंजीनियर संयुक्त प्रयास कर रहे हैं।

नेपाली सेना भी प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चला रही है। सेना की टीमें बाढ़ में अपना घर-बार और अन्य सामान गंवा चुके लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने में जुटी हैं। इस बीच भारत ने मानवीय सहायता के तहत अपना चौथा विमान भी नेपाल भेजा है।

काठमांडू में फंसे 102 भारतीय तीर्थयात्री सुरक्षित लौटे

भीषण बाढ़ के बाद काठमांडू में फंसे नागपुर के 102 तीर्थयात्री रविवार सुबह सुरक्षित महाराष्ट्र लौट आए। अधिकारियों के मुताबिक, ये तीर्थयात्री 19 अगस्त को पशुपतिनाथ मंदिर और नेपाल के अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए गए थे। बाढ़ के कारण वे 27 अगस्त तक काठमांडू में रुके रहे।

विदर्भ के अन्य हिस्सों के चार तीर्थयात्री शनिवार को विमान से महाराष्ट्र पहुंचे, जबकि नागपुर के 102 यात्री रविवार तड़के करीब 4:30 बजे ट्रेन से नागपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे। सुरक्षित वापसी के बाद उनके परिजनों ने राहत की सांस ली।

ग्यिरोंग में 261 विदेशी नागरिक लापता

चीनी समाचार मीडिया के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में अब तक 261 विदेशी नागरिकों के लापता होने की सूचना सामने आई है। इनमें 49 भारतीय और 104 नेपाली नागरिक शामिल हैं। बाढ़ के समय कुछ भारतीय तीर्थयात्रियों के तिब्बत-नेपाल सीमा पर स्थित इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद होने की बात भी सामने आई है।

ग्यिरोंग काउंटी में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पूरा इमिग्रेशन सेंटर बाढ़ के पानी में डूबा हुआ दिखाई दे रहा है।

11 हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोग

बाढ़ के बाद नेपाल के 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में करीब 573 लोगों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या चार प्रमुख परियोजनाओं में फंसे लोगों की है।

जानकारी के अनुसार, त्रिशुली-1 परियोजना में करीब 322, अपर त्रिशुली-3बी में 122, अपर त्रिशुली-3ए में 43 और रासुवागढ़ी हाइड्रोपावर परियोजना में 44 लोग फंसे या लापता बताए जा रहे हैं। इन लोगों में नेपाल के अलावा भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के नागरिक भी शामिल हैं।

एक खतरा टला, भोटेकोशी में नई झील से चिंता

नेपाल-तिब्बत सीमा पर झील फटने से पैदा हुआ तत्काल खतरा फिलहाल टल गया है। झील का एक किनारा टूटने के बाद वहां जमा पानी नियंत्रित तरीके से बाहर निकल रहा है और फिलहाल पानी के बहाव में कोई तेज बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई है।

हालांकि, भोटेकोशी नदी पर एक नया खतरा मंडरा रहा है। भारी मात्रा में मलबा जमा होने से वहां एक नई झील बन गई है। चीनी अधिकारियों ने इसकी लगातार निगरानी की जरूरत बताई है। अधिकारियों को आशंका है कि यदि यह झील अचानक फटती है तो इलाके में दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

अमेरिका देगा 3.6 मिलियन डॉलर की सहायता

नेपाल में राहत एवं पुनर्वास प्रयासों के लिए अमेरिका ने 3.6 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता देने का वादा किया है। नेपाल के स्टेट डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी दी।

अमेरिकी सहायता में करीब 10,000 परिवारों के लिए तीन महीने की आपातकालीन खाद्य सहायता भी शामिल होगी। अमेरिका ने कहा है कि वह इस मुश्किल घड़ी में नेपाल की जनता के साथ खड़ा है।

फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। लापता लोगों की तलाश, सुरंगों में फंसे श्रमिकों को निकालने और प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।