नेपाल में सीमा विवाद फिर गरमाया, भारत से वार्ता की मांग तेज

0

[ad_1]

काठमांडू :  नेपाल में भारत से जुड़े सीमा विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार से मांग की है कि वह लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा जैसे विवादित क्षेत्रों को लेकर भारत के साथ उच्च स्तरीय वार्ता शुरू करे।

विपक्ष का कहना है कि केवल औपचारिक पत्राचार या कूटनीतिक बयानबाजी से इस लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद का समाधान संभव नहीं है। इसलिए सरकार को इस मुद्दे पर ठोस और सक्रिय कूटनीतिक पहल करनी चाहिए।

नेपाल लंबे समय से दावा करता रहा है कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से उसके भूभाग का हिस्सा हैं। इसके लिए 1816 की सुगौली संधि को आधार बताया जाता है। वहीं भारत इन क्षेत्रों को अपने प्रशासनिक नियंत्रण में बताते हुए नेपाल के दावों को खारिज करता रहा है।

हाल के वर्षों में लिपुलेख मार्ग से भारत–चीन व्यापार और कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ी गतिविधियों ने इस विवाद को फिर से राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है, जिससे नेपाल में घरेलू दबाव बढ़ गया है।

नेपाल के विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर स्पष्ट और प्रभावी रुख नहीं अपना रही है। विपक्ष का कहना है कि यह मामला केवल सीमा विवाद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़ा प्रश्न है, जिस पर भारत के साथ सीधी वार्ता आवश्यक है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार के सामने यह मुद्दा एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती के रूप में उभर रहा है। घरेलू राजनीतिक दबाव के बीच सरकार के लिए पड़ोसी देशों के साथ संतुलन बनाए रखना भी एक अहम परीक्षा माना जा रहा है।

[ad_2]