नेतन्याहू का बड़ा बयान—लेबनान और गाज़ा में सैन्य कार्रवाई और तेज़


डेस्क : इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को दावा किया कि इज़राइली सुरक्षा बलों ने दक्षिणी लेबनान में स्थित ऐतिहासिक बॉफोर्ट किले पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम (सीजफायर) लागू है।

एक टेलीविज़न संबोधन में नेतन्याहू ने कहा, “हमारे वीर सैनिकों ने बीती रात बॉफोर्ट किले पर कब्ज़ा कर लिया और वहां इज़राइल राज्य तथा गोलानी ब्रिगेड का झंडा फहराया।” उन्होंने इसे “राष्ट्रीय एकता और सैन्य दृढ़ता” का प्रतीक बताया।

नेतन्याहू ने आगे कहा कि यह अभियान इज़राइल की सैन्य रणनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। उनके अनुसार, इज़राइली सेना ने लितानी नदी को पार कर रणनीतिक ऊँचाइयों पर नियंत्रण स्थापित किया है और अब उसे हिज़्बुल्लाह के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में उपस्थिति और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने दावा किया कि हाल के अभियानों में हजारों हिज़्बुल्लाह लड़ाकों को निशाना बनाया गया है और इज़राइली सेना कई मोर्चों—गाज़ा, सीरिया और लेबनान—पर एक साथ कार्रवाई कर रही है।

इज़राइली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने भी टेलीग्राम पर जारी बयान में पुष्टि की कि बीते कई दिनों से बॉफोर्ट रिज और वादी अल-सलुकी क्षेत्र में सैन्य अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य हिज़्बुल्लाह के बुनियादी ढांचे को नष्ट करना और उत्तरी इज़राइल के सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

आईडीएफ के अनुसार, इस अभियान में वायु हमलों, तोपखाने और टैंक कार्रवाई के साथ-साथ इंजीनियरिंग इकाइयों की मदद ली गई, ताकि रणनीतिक ठिकानों को नियंत्रित किया जा सके। सेना ने यह भी कहा कि उसका लक्ष्य “फॉरवर्ड डिफेंस लाइन” को आगे बढ़ाना और सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत करना है।

इज़राइली सेना ने यह संकेत भी दिया है कि दक्षिणी लेबनान के नबातिये क्षेत्र के आसपास अभियान आगे बढ़ाया जा सकता है।

इस बीच, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने गाज़ा पट्टी को लेकर भी विस्तारवादी रुख दोहराते हुए कहा कि इज़राइल धीरे-धीरे वहां लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में इज़राइल लगभग 60 प्रतिशत गाज़ा क्षेत्र पर नियंत्रण रखता है, जबकि पहले यह आंकड़ा लगभग 50 प्रतिशत था।

नेतन्याहू के इन बयानों के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से ही गाज़ा और दक्षिणी लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की जाती रही है।

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