डेस्क : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर भरोसे की कमी जताते हुए कहा है कि तेहरान बार-बार अपने वादों से पीछे हटता रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते अभी खुले हुए हैं और अमेरिकी अधिकारी ईरानी प्रतिनिधियों के संपर्क में हैं।
कैंप डेविड में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं, क्योंकि वह कई बार अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन कर चुका है। उन्होंने कहा, “वे झूठ बोलते हैं और गलत जानकारी देते हैं। वे हमेशा बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन अक्सर अपने वादे तोड़ देते हैं।”
ट्रंप ने बताया कि अमेरिका की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो बातचीत की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमारे पास बेहतरीन लोग हैं, जो बातचीत कर रहे हैं।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति का जिक्र करते हुए जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह हमला उस समय हुआ, जब दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी। ट्रंप ने बताया कि उन्हें अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ से सूचना मिली कि अमेरिकी ठिकाने पर पांच मिसाइलें दागी गई हैं।
भविष्य में ईरान की ओर से किसी और हमले की संभावना से जुड़े सवाल पर ट्रंप ने कहा कि इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “यह कहना मूर्खता होगी कि ऐसा नहीं होगा। हमें हमेशा सतर्क रहना होगा।”
ईरान की दीर्घकालिक क्षमता पर टिप्पणी करते हुए ट्रंप ने कहा कि समय के साथ तेहरान की ताकत कमजोर पड़ सकती है। उन्होंने कहा, “वे कमजोर होते जाएंगे। हो सकता है अभी कुछ समय के लिए मजबूत दिखें, लेकिन अंततः उनकी क्षमता कम होती जाएगी।”
ट्रंप के ये बयान ऐसे समय आए हैं, जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और पश्चिम एशिया की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से जारी तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।








