डेस्क : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात के दौरान ताइवान के मुद्दे पर चीन का रुख स्पष्ट किया। शी ने अमेरिका से ‘ताइवान स्वतंत्रता’ का विरोध करने और ताइवान से जुड़े मुद्दे को सावधानी से संभालने का आग्रह किया। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
24 सितंबर को हुई यह बैठक छह महीने से भी कम समय में शी और ट्रंप की दूसरी मुलाकात रही। तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा पर पहुंचे शी ने कहा कि चीन और अमेरिका को रणनीतिक स्थिरता वाले रचनात्मक संबंधों की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने, प्रतिस्पर्धा को उचित दायरे में रखने और मतभेदों को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने पर जोर दिया।
व्यापार संबंधों पर भी हुई चर्चा
शी ने कहा कि चीन और अमेरिका के आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों को स्थिर बनाए रखने के लिए सहयोग के क्षेत्रों को बढ़ाने और विवाद के मुद्दों को कम करने की जरूरत है। उन्होंने दोनों देशों के आर्थिक एवं व्यापारिक दलों के बीच हालिया बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि समानता, पारस्परिक सम्मान और पारस्परिक लाभ की भावना के साथ मतभेदों का समाधान निकाला जा सकता है।
एआई में सहयोग की पैरवी
कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर शी ने कहा कि चीन और अमेरिका दोनों के पास एआई के क्षेत्र में मजबूत क्षमताएं हैं। उन्होंने प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। शी ने एआई के जोखिम और लाभ पर दोनों देशों के बीच संवाद जारी रखने तथा इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए संयुक्त प्रयासों का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा कि एआई को मानव नियंत्रण में रखा जाना चाहिए और इसका विकास मानवता की प्रगति तथा सकारात्मक उद्देश्यों के लिए होना चाहिए। ट्रंप ने भी एआई को मानवता के भविष्य से जुड़ा विषय बताते हुए दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
ताइवान पर चीन ने दोहराया पुराना रुख
शी ने कहा कि राष्ट्रीय एकीकरण और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा को लेकर चीन का रुख स्पष्ट है। उन्होंने अमेरिका से ‘ताइवान स्वतंत्रता’ का विरोध करने का आग्रह किया। बीजिंग ताइवान को चीन का हिस्सा मानता है और उसकी औपचारिक स्वतंत्रता के किसी भी प्रयास का विरोध करता है। ताइवान का मुद्दा लंबे समय से चीन-अमेरिका संबंधों में प्रमुख विवाद का विषय रहा है।
मध्य-पूर्व और यूक्रेन पर भी चर्चा
ट्रंप ने शी की यात्रा को ‘महत्वपूर्ण’ बताते हुए दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संवाद जारी रखने की बात कही। दोनों नेताओं ने मध्य-पूर्व की स्थिति, यूक्रेन संकट और कोरियाई प्रायद्वीप के घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
दोनों नेताओं ने 2026 एपीईसी आर्थिक नेताओं की बैठक और जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी में एक-दूसरे को समर्थन देने पर भी सहमति जताई। बैठक में चीन की ओर से कैई छी, विदेश मंत्री वांग यी और उपप्रधानमंत्री हे लिफेंग समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।








