पीएम मोदी-शी वार्ता में सीमा पर शांति और ‘तीन पारस्परिकताओं’ पर जोर

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नई दिल्ली :  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई द्विपक्षीय वार्ता को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता यानी ‘तीन पारस्परिकताओं’ का पालन जरूरी है।

विदेश मंत्रालय की नियमित मीडिया ब्रीफिंग में जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान भारत की प्रमुख चिंताओं को चीन के सामने रखा। उन्होंने दोनों पक्षों से एक-दूसरे की मूलभूत चिंताओं के प्रति संवेदनशील रहने और संबंधों को ‘तीन पारस्परिकताओं’ के आधार पर आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों में निरंतर प्रगति के लिए जरूरी आधार है। उन्होंने सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों और आपसी सहमतियों का पालन करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

दोनों नेताओं ने सीमा विवाद के समाधान के लिए दीर्घकालिक राजनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की प्रतिबद्धता जताई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्ष सीमा प्रश्न का निष्पक्ष, उचित और परस्पर स्वीकार्य समाधान तलाशने के लिए रचनात्मक एवं निरंतर कूटनीतिक संवाद जारी रखने पर सहमत हुए।

वार्ता के दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने साझा हितों वाले क्षेत्रों को बढ़ाने और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई। भारत ने इस दौरान अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के दृष्टिकोण को भी कायम रखा।

चीन की ओर से जारी बयान में दोनों देशों को ‘प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार’ बताया गया। हालांकि, भारत के आधिकारिक बयान में इस शब्दावली को दोहराने के बजाय आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित व्यावहारिक दृष्टिकोण पर जोर दिया गया।

चीनी पक्ष के बयान में ताइवान और तिब्बत को लेकर भारत के रुख तथा भारत की ओर से अपने क्षेत्र में चीन विरोधी गतिविधियों की अनुमति नहीं देने का भी उल्लेख किया गया। वहीं, भारत की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में द्विपक्षीय संबंधों के लिए सिद्धांत आधारित दृष्टिकोण और एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता को प्रमुखता दी गई।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ थीम के तहत किया गया। सम्मेलन के समापन पर नई दिल्ली घोषणा-पत्र 2026 को अपनाया गया, जिसमें पश्चिम एशिया सहित विभिन्न वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों और चुनौतियों पर भी चर्चा की गई।