नई दिल्ली : पूर्व प्रधानमंत्री और देश के पूर्व वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के स्मारक के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। दिल्ली अर्बन आर्ट्स कमीशन (डीयूएसी) ने राजघाट स्थित राष्ट्रीय स्मृति स्थल में प्रस्तावित स्मारक को सशर्त मंजूरी दे दी है। हालांकि, आयोग ने स्मारक के डिजाइन, निर्माण सामग्री और आसपास के लैंडस्केप को वहां मौजूद अन्य स्मारकों के अनुरूप रखने के निर्देश दिए हैं।
डीयूएसी की मंजूरी में कहा गया है कि प्रस्तावित स्मारक की वास्तुकला, रंग, सामग्री, रास्ते और बाहरी सज्जा राष्ट्रीय स्मृति स्थल के मौजूदा स्वरूप के साथ सामंजस्य में होनी चाहिए। स्मारक की अपनी अलग पहचान बनी रहे, लेकिन पूरे परिसर की स्थापत्य और प्राकृतिक संरचना पर उसका प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
पेड़ और हरियाली का भी रखना होगा ध्यान
आयोग ने स्मारक स्थल पर मौजूद एक पेड़ को सुरक्षित रखने और उसकी जड़ों, स्वास्थ्य तथा भविष्य की वृद्धि को प्रभावित नहीं करने के निर्देश दिए हैं। लॉन, पौधरोपण, फूलों की क्यारियों, पक्के रास्तों और आसपास के क्षेत्र के लैंडस्केप को भी मौजूदा परिसर के अनुरूप तैयार करना होगा।
सफेद संगमरमर के इस्तेमाल पर भी विचार
स्मारक के लिए सफेद संगमरमर या सफेद ग्रेनाइट के इस्तेमाल का प्रस्ताव रखा गया है। डीयूएसी ने निर्देश दिया है कि सामग्री और रंगों का चयन राष्ट्रीय स्मृति स्थल में मौजूद अन्य समाधियों के साथ दृश्य सामंजस्य को ध्यान में रखकर किया जाए।
इसके अलावा स्मारक तक जाने वाले रास्तों, रेलिंग, संकेतक, पट्टिकाओं और सीमा संबंधी संरचनाओं के डिजाइन में भी एकरूपता रखने को कहा गया है। आगंतुकों के लिए जूते उतारने की व्यवस्था तथा रास्ते के दोनों ओर बैठने के लिए बेंच लगाने का भी प्रावधान किया गया है।
डीयूएसी ने स्पष्ट किया है कि उसकी मंजूरी मुख्य रूप से वास्तुकला, शहरी डिजाइन और सौंदर्य संबंधी पहलुओं तक सीमित है। परियोजना को भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) की शर्तों तथा अन्य सभी वैधानिक आवश्यकताओं का पालन करना होगा।
डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 को 92 वर्ष की आयु में निधन हुआ था। वे 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे और 1991 में वित्त मंत्री के रूप में आर्थिक सुधारों के दौर में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।








