रोहित-विराट जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को लेकर सदागोपन रमेश ने उठाए सवाल,

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स्पोर्ट्स डेस्क : भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज सदागोपन रमेश ने भारतीय क्रिकेट टीम के चयन और टीम मैनेजमेंट की नीति पर सवाल उठाए हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में भारत की जीत के बाद रमेश ने कहा कि टीम में खिलाड़ियों के चयन के लिए समान मापदंड नहीं अपनाए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, युवा खिलाड़ियों को लगातार मौके दिए जाते हैं, जबकि 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र के खिलाड़ियों के मामले में टीम मैनेजमेंट उनकी एक नाकामी का इंतजार करता है।

रमेश ने कहा कि चयन में उम्र एक अहम factor बनती जा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले 35 वर्ष से अधिक उम्र के खिलाड़ी से भी अपनी जगह किसी ऐसे 25 वर्षीय खिलाड़ी के लिए छोड़ने को कहा जाता है, जिसका प्रदर्शन निरंतर नहीं रहा है।

पूर्व ओपनर ने अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन का उदाहरण देते हुए चयन नीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि टी20 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन करने वाले संजू सैमसन को लगातार तीन पारियों में असफल रहने के बाद टीम से बाहर कर दिया गया, जबकि अभिषेक शर्मा को खराब प्रदर्शन के बावजूद लगातार मौके मिल रहे हैं। रमेश के अनुसार, टी20 विश्व कप के बाद अभिषेक के प्रदर्शन में गिरावट आई है और जिम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज में वह केवल 11 रन बना सके।

रमेश ने यह भी कहा कि अगर अनुभवी बल्लेबाज रोहित शर्मा इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे वनडे में भी असफल रहते, तो उनके टीम से बाहर होने की संभावना बन सकती थी। हालांकि, रोहित ने उस मुकाबले में शानदार 138 रन की पारी खेलकर आलोचकों को जवाब दिया।

30 से अधिक उम्र के खिलाड़ियों की टीम से सीरीज कराने का सुझाव

सदागोपन रमेश ने एक काल्पनिक टी20 सीरीज का सुझाव देते हुए कहा कि यदि 30 वर्ष से अधिक उम्र के अनुभवी खिलाड़ियों और युवा खिलाड़ियों की अलग-अलग टीमें बनाई जाएं और उनके बीच तीन या पांच मैचों की सीरीज कराई जाए, तो चयन नीति को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी सीरीज में रोहित शर्मा, विराट कोहली, केएल राहुल, सूर्यकुमार यादव, संजू सैमसन, हार्दिक पांड्या, रवींद्र जडेजा, रविचंद्रन अश्विन, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार जैसे अनुभवी खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं।

रमेश का मानना है कि अनुभव और निरंतरता के कारण 30 वर्ष से अधिक उम्र वाले खिलाड़ियों की टीम ऐसी सीरीज में युवा टीम पर भारी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि इससे यह भी पता चलेगा कि केवल उम्र के आधार पर अनुभवी खिलाड़ियों को नजरअंदाज करना कितना उचित है।