रूस पर प्रतिबंधों का नया विधेयक अमेरिकी सदन से पारित, भारत पर 100% तक टैरिफ का प्रावधान

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डेस्क :  रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और यूक्रेन के समर्थन में अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस के अधिकारियों और आर्थिक क्षेत्रों को निशाना बनाने वाले व्यापक प्रतिबंध विधेयक को 262-159 मतों से मंजूरी दे दी। अब यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा।

दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में नामित इस विधेयक को तैयार करने में एक वर्ष से अधिक समय तक बातचीत चली। विधेयक को ट्रंप का समर्थन मिलने में ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों को पांच वर्ष तक बढ़ाने की उनकी मांग की भी अहम भूमिका रही।

यह विधेयक ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद यूक्रेन के समर्थन में अमेरिकी संसद की ओर से उठाया गया अब तक का सबसे बड़ा विधायी कदम माना जा रहा है। वर्ष 2024 में आपातकालीन सहायता पैकेज पारित होने के बाद लगभग दो वर्षों तक इस मुद्दे पर अमेरिकी संसद में गतिरोध बना रहा था।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी विधेयक के समर्थन में अमेरिकी सांसदों से संपर्क किया था। मतदान से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि युद्ध के दौरान कई बार कुछ न करना के बजाय कम-से-कम एक निर्णय लेना बेहतर होता है, भले ही वह पूरी तरह सही न हो।

रूसी अधिकारियों और बैंकिंग क्षेत्र पर बढ़ेगा दबाव

विधेयक में रूसी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और बैंकिंग क्षेत्र पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा रूस की ऊर्जा आपूर्ति को पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद जारी रखने में मदद करने वाले तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ के जहाजों को भी निशाना बनाया गया है।

विधेयक राष्ट्रपति को रूस से पेट्रोलियम या प्राकृतिक गैस आयात करने वाले पांच प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हालांकि, इसमें उन देशों के लिए एक अपवाद रखा गया है जो रूस के प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम आयात करते हैं और रूसी गैस खरीद को कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा चुके हैं।

भारत पर भी 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान

विधेयक में भारत के लिए भी एक नया कानूनी प्रावधान किया गया है। इसके तहत रूस से लगातार ऊर्जा खरीद जारी रखने की स्थिति में अमेरिका भारत से होने वाले आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है।

भारत और चीन रूस से कच्चे तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं। इसी वजह से विधेयक के समर्थकों ने दोनों देशों को इसके टैरिफ प्रावधानों के प्रमुख संभावित निशानों के रूप में देखा है। इसका उद्देश्य अमेरिकी बाजार तक पहुंच को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हुए रूस की ऊर्जा आय को सीमित करना है।

हालांकि, विधेयक अपने आप भारत से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं करता। यह केवल अमेरिकी राष्ट्रपति को निर्धारित कानूनी परिस्थितियों में ऐसा टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। विधेयक कानून बनने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप को इन अधिकारों का इस्तेमाल करने का विकल्प मिलेगा।

सीनेट में पहले ही मिल चुकी है मंजूरी

अमेरिकी सीनेट इस विधेयक को सात अगस्त को 86-11 के भारी बहुमत से मंजूरी दे चुकी है। इसके बाद प्रतिनिधि सभा में टैरिफ संबंधी प्रावधानों को लेकर मतभेद के कारण विधेयक की आगे की प्रक्रिया धीमी पड़ गई थी।

अब प्रतिनिधि सभा की मंजूरी के बाद विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप के पास पहुंच गया है। उनके हस्ताक्षर के बाद अमेरिका के पास रूस तथा रूसी ऊर्जा कारोबार जारी रखने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रतिबंध और टैरिफ संबंधी अधिकार होंगे।