नई दिल्ली : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 2024 में हुए जुलाई-अगस्त आंदोलन को लेकर बुधवार को पहली बार विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आंदोलन महज छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं था, बल्कि कोटा सुधार की मांग को एक सुनियोजित तरीके से राजनीतिक हथियार में बदलकर उनकी सरकार को हटाने और सत्ता परिवर्तन की कोशिश की गई।
नई दिल्ली में फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया की ओर से आयोजित वर्चुअल मीडिया संवाद में हसीना ने बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से वह अपने देश को पीड़ा से गुजरते देख रही हैं। हसीना के मुताबिक, यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसे बनाने के लिए 1971 में तीन लाख लोगों ने बलिदान दिया था।
‘कोटा सुधार आंदोलन को बनाया गया राजनीतिक हथियार’
जुलाई-अगस्त 2024 के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए हसीना ने कहा कि उनकी सरकार ने कोटा सुधार आंदोलन को बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के जरिए सुलझाने की कोशिश की थी। उनका आरोप है कि इसके पीछे संगठित समूह सक्रिय थे, जिन्होंने छात्रों की मांग को हिंसक राजनीतिक आंदोलन में बदल दिया।
उन्होंने कहा कि कोटा सुधार की मांग धीरे-धीरे उनकी सरकार के इस्तीफे की एक सूत्रीय मांग में बदल गई। हसीना ने दावा किया कि सुनियोजित तरीके से गलत प्रचार किया गया और वास्तविक छात्रों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया गया, जबकि संगठित समूहों ने आंदोलन की आड़ में हिंसा और सत्ता परिवर्तन की कोशिश की।
15 जुलाई के बाद बढ़ी हिंसा का लगाया आरोप
हसीना ने आरोप लगाया कि 15 जुलाई 2024 के बाद प्रदर्शन व्यापक हिंसा में बदल गया। उन्होंने आंदोलन के दौरान हत्या, आगजनी, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और कानून-व्यवस्था से जुड़े कर्मियों पर हमले का दावा किया।
पूर्व प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि उनके सत्ता से हटने के बाद अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उनका दावा है कि बड़ी संख्या में लोग मारे गए, लापता हुए या गिरफ्तार किए गए और लाखों लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए।
हसीना ने नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सरकार द्वारा हिंसा की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच प्रक्रिया को रोक दिया गया।
मुक्ति संग्राम के प्रतीकों को नुकसान पहुंचाने का आरोप
हसीना ने दावा किया कि बांग्लादेश के 1971 के मुक्ति संग्राम से जुड़े प्रतीकों को भी नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने अल्पसंख्यक समुदायों और पत्रकारों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया।
उन्होंने ढाका स्थित धनमंडी-32 में अपने पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के ऐतिहासिक आवास को गिराए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मुक्ति संग्राम की विरासत को मिटाने की कोशिश का हिस्सा था।
5 अगस्त 2024 को भारत आई थीं हसीना
शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश छोड़कर भारत आई थीं। इसके साथ ही उनके 15 वर्ष लंबे शासन का अंत हुआ था। इसके बाद बांग्लादेश में अंतरिम सरकार का गठन हुआ। हसीना को बाद में मौत की सजा सुनाई गई। इसके बावजूद उन्होंने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई थी।
बुधवार का वर्चुअल संबोधन भारत आने के बाद हसीना का पहला बड़ा मीडिया संवाद बताया गया।
भारत ने कार्यक्रम से किया किनारा
हसीना के संबोधन से पहले भारत सरकार ने इस कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि सरकार का इस कार्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं है और मंच पर व्यक्त किए जाने वाले विचारों का वह समर्थन नहीं करती।
विदेश मंत्रालय ने हाल ही में एक संसदीय समिति को बताया था कि हसीना को भारत में शरण दिए जाने के बावजूद नई दिल्ली की नीति स्पष्ट है कि भारतीय जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे संप्रभु देश के खिलाफ राजनीतिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि, ढाका ने इस मामले पर चिंता जताई है। बांग्लादेशी पक्ष ने सोमवार को भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के समक्ष भी यह मुद्दा उठाया। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, हसीना को भारत से राजनीतिक बयान देने की अनुमति दिए जाने से दोनों देशों के बीच पहले से नाजुक संबंधों पर और असर पड़ सकता है।
फरवरी 2026 में BNP की जीत
हसीना के सत्ता से हटने के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम प्रशासन ने जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद फरवरी 2026 में बांग्लादेश में संसदीय चुनाव हुए। चुनाव में तारीक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने जीत हासिल की, जबकि अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया।
ढाका की मौजूदा सरकार हसीना की ओर से लगाए गए राजनीतिक प्रताड़ना के आरोपों को लगातार खारिज करती रही है।
BRICS सम्मेलन में शामिल होने के लिए तारीक रहमान को भारत का न्योता
इस बीच भारत सरकार ने पहली बार पुष्टि की है कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान को सितंबर में भारत में होने वाले आगामी BRICS सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से रहमान को पहले ही द्विपक्षीय यात्रा का निमंत्रण दिया जा चुका है। हालांकि, नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा निमंत्रण BRICS के आउटरीच सत्र के लिए है, जिसमें रहमान BIMSTEC के अध्यक्ष के रूप में हिस्सा लेंगे।








