सितंबर में बढ़ी पेट्रोल-डीजल की मांग, एलपीजी की खपत घटी

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डेस्क : देश में सितंबर के दौरान पेट्रोल और डीजल की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि रसोई गैस (एलपीजी) की खपत में गिरावट रही। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में पेट्रोल की बिक्री पिछले साल के इसी महीने की तुलना में करीब 7.2 प्रतिशत बढ़कर 36.4 लाख टन रही। डीजल की बिक्री भी करीब 4.9 प्रतिशत बढ़कर 71.2 लाख टन पर पहुंच गई।

इसके विपरीत, एलपीजी की खपत में करीब 9.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर लगभग 26.4 लाख टन रह गई। ईंधन की मांग के ये आंकड़े देश में परिवहन और घरेलू ऊर्जा खपत के बदलते रुझान की तस्वीर पेश करते हैं।

पेट्रोल की मांग में तेजी

पेट्रोल की खपत बढ़ने के पीछे सड़क परिवहन और वाहनों की आवाजाही में बढ़ोतरी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। निजी वाहनों के इस्तेमाल में वृद्धि के साथ पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की संख्या बढ़ने का असर भी मांग पर पड़ा है।

त्योहारी गतिविधियों और सितंबर में बढ़ी आवाजाही ने भी पेट्रोल की बिक्री को सहारा दिया। हालांकि, क्षेत्रवार मांग में अंतर देखा जा सकता है।

डीजल की खपत भी बढ़ी

डीजल की मांग में बढ़ोतरी के पीछे परिवहन और माल ढुलाई के साथ कृषि क्षेत्र में डीजल की जरूरत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सिंचाई और कृषि कार्यों में डीजल की मांग बनी रही, वहीं सड़क परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों ने भी इसकी खपत को बढ़ाया।

देश में पेट्रोलियम उत्पादों में डीजल की हिस्सेदारी सबसे अधिक है और इसकी मांग को आर्थिक गतिविधियों की गति का एक महत्वपूर्ण संकेतक भी माना जाता है।

एलपीजी की खपत क्यों घटी?

पेट्रोल-डीजल के विपरीत एलपीजी की खपत में गिरावट दर्ज की गई। इसका एक प्रमुख कारण आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां और आयात पर निर्भरता रही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति में व्यवधान का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा।

इसके अलावा, जिन क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की सुविधा उपलब्ध है, वहां कुछ उपभोक्ताओं का एलपीजी से पीएनजी की ओर रुख भी घरेलू गैस की मांग को प्रभावित कर रहा है।

छह महीने में भी पेट्रोल-डीजल आगे

अप्रैल से सितंबर की अवधि में भी पेट्रोल और डीजल की मांग में सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में पेट्रोल की खपत करीब 7 प्रतिशत और डीजल की मांग लगभग 4.9 प्रतिशत बढ़ी। वहीं, एलपीजी की खपत में इस अवधि के दौरान करीब 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

ईंधन की खपत के आंकड़े बताते हैं कि सितंबर में परिवहन क्षेत्र से जुड़ी पेट्रोल-डीजल की मांग मजबूत रही, जबकि एलपीजी की खपत पर आपूर्ति और घरेलू ईंधन के बदलते विकल्पों का असर दिखाई दिया।