स्किल इंडिया को नई दिशा, अब युवाओं की ट्रेनिंग से ज्यादा नौकरी पर रहेगा फोकस

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डेस्क :देश में कौशल विकास कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने की दिशा में सरकार नई पहल करने जा रही है। अब युवाओं को केवल प्रशिक्षण और प्रमाण पत्र देने के बजाय इस बात पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा कि प्रशिक्षण के बाद उन्हें रोजगार मिला या नहीं और वे कितने समय तक नौकरी में बने रहे।

सरकार की योजना ‘स्किल आउटकम्स फंड’ के माध्यम से कौशल विकास योजनाओं को रोजगार परिणामों से जोड़ने की है। इस मॉडल का उद्देश्य प्रशिक्षण संस्थानों की जवाबदेही बढ़ाना और युवाओं को वास्तविक रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

ट्रेनिंग के साथ रोजगार होगा मुख्य लक्ष्य

नई व्यवस्था में कौशल प्रशिक्षण की सफलता का आकलन केवल प्रशिक्षित युवाओं की संख्या के आधार पर नहीं किया जाएगा। अब यह देखा जाएगा कि कितने युवाओं को नौकरी मिली, उनकी आय में कितना सुधार हुआ और वे रोजगार में कितने समय तक टिके रहे।

फंडिंग भी रोजगार परिणामों से होगी जुड़ी

इस पहल के तहत कौशल विकास संस्थानों को बेहतर रोजगार परिणाम देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निवेश तभी प्रभावी माना जाएगा, जब उसका सीधा लाभ युवाओं के रोजगार और करियर विकास के रूप में दिखाई दे।

उद्योग की जरूरतों के अनुसार मिलेगा प्रशिक्षण

नई व्यवस्था में युवाओं को ऐसे कौशल सिखाने पर जोर दिया जाएगा, जिनकी मांग बाजार और उद्योगों में अधिक है। इससे प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को नौकरी के लिए अधिक तैयार किया जा सकेगा और कंपनियों को भी प्रशिक्षित कार्यबल उपलब्ध होगा।

रोजगार आधारित मॉडल से बढ़ेगी पारदर्शिता

विशेषज्ञों के अनुसार, कौशल विकास योजनाओं को रोजगार से जोड़ने से प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार आएगा। इससे युवाओं को केवल प्रमाण पत्र हासिल करने के बजाय अपने करियर को मजबूत बनाने का अवसर मिलेगा।

सरकार का लक्ष्य है कि कौशल विकास कार्यक्रमों को रोजगार केंद्रित बनाकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए।