जयपुर : निर्माण नगर स्थित महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल के संबोधि सभागार में मंगलवार को आयोजित ‘‘समस्या और समाधान’’ विषयक कार्यशाला में जैन संत मुनि श्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि संसार समस्याओं से परिपूर्ण है और ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसके जीवन में किसी प्रकार की समस्या न हो। उन्होंने कहा कि जीवन में बोलना भी समस्या बन सकता है और न बोलना भी, सुनना भी समस्या का कारण हो सकता है और न सुनना भी। इसलिए समस्याओं से बचने के बजाय उन्हें समझना आवश्यक है।
मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन में अधिकांश समस्याओं का कारण उसकी अपेक्षाएँ होती हैं। व्यक्ति जैसा चाहता है, वैसा नहीं होने पर तनाव और अशांति उत्पन्न होती है। उन्होंने बताया कि समस्या का दूसरा प्रमुख कारण व्यक्ति का दृष्टिकोण है। सम्यक एवं सकारात्मक दृष्टिकोण समाधान की ओर ले जाता है, जबकि नकारात्मक दृष्टिकोण समस्याओं को और बढ़ा देता है।
उन्होंने कहा कि अनेक लोग समस्या की वास्तविक प्रकृति को जाने बिना ही समाधान खोजने लगते हैं, जिससे अनावश्यक तनाव पैदा होता है। इसलिए किसी भी स्थिति में समाधान तलाशने से पहले यह जानना आवश्यक है कि समस्या क्या है, उसका स्वरूप क्या है और वास्तव में वह समस्या है भी या नहीं। समस्या को समझने के बाद ही सही समाधान प्राप्त किया जा सकता है।
इस अवसर पर मुनि श्री संभव कुमार जी ने कहा कि अज्ञान संसार की सबसे बड़ी समस्या है। अज्ञानी व्यक्ति स्वयं भी दुःख पाता है और दूसरों के लिए भी परेशानी का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि आत्मज्ञान का प्रकाश ही जीवन की अधिकांश समस्याओं का स्थायी समाधान प्रदान करता है, जबकि केवल बौद्धिक अथवा भौतिक ज्ञान स्थायी शांति नहीं दे सकता।
कार्यक्रम का शुभारंभ तीर्थंकर भगवान की स्तुति के साथ हुआ। उपस्थित जनों को प्रेक्षाध्यान का अभ्यास भी कराया गया। अंत में वैराग्य गीतों की मधुर स्वर लहरियों के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।


