सुभाष गोयल : स्वदेशी से आत्मनिर्भरता तक, नए भारत के आर्थिक निर्माण की गाथा

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जयपुर : व्यापार केवल लाभ-हानि का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र की आर्थिक शक्ति और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण आधार है। यदि देश का व्यापारी सशक्त होगा, स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन मिलेगा और युवा डिजिटल तकनीक तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाएंगे, तो भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। यह कहना है राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड, भारत सरकार के सदस्य एवं जयपुर व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सुभाष गोयल का।

कटिंग चाय मंच से विशेष संवाद में गोयल ने अपने जीवन, व्यापार, समाजसेवा और राष्ट्रहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि बचपन से ही नेतृत्व और समाज के लिए कुछ करने की भावना उनके भीतर रही। राजस्थान के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ उनका सफर आज व्यापारिक संगठनों और राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड तक पहुंचा है।

 

किराने की दुकान से शुरू हुआ सफर

सुभाष गोयल का जन्म गांव बदाल में हुआ। परिवार का पारंपरिक किराना व्यवसाय था। आठवीं तक की शिक्षा गांव में पूरी करने के बाद वे जयपुर आए और माणक चौक स्कूल में अध्ययन किया। इसके बाद अग्रवाल कॉलेज में शिक्षा ग्रहण की। पढ़ाई के साथ ही उन्होंने चांदपोल बाजार स्थित किराने की दुकान पर बैठकर व्यापार की बारीकियां सीखीं।

वे बताते हैं कि व्यापार उनके लिए केवल पारिवारिक परंपरा नहीं रहा, बल्कि समाज के साथ जुड़ने और लोगों के लिए कार्य करने का माध्यम भी बना। यही भावना आगे चलकर उन्हें व्यापारिक संगठनों और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ती चली गई।

‘स्वदेशी’ केवल उत्पाद नहीं, राष्ट्रनिर्माण का संकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और स्वदेशी के आह्वान को उन्होंने आर्थिक आत्मनिर्भरता का मंत्र बताया। गोयल के अनुसार, स्वदेशी का अर्थ केवल देश में निर्मित वस्तु खरीदना नहीं, बल्कि देश के श्रमिक, कारीगर, उद्यमी और व्यापारी को सशक्त करना भी है।

उन्होंने बताया कि स्वदेशी अभियान के अंतर्गत जयपुर के हवा महल से विशेष अभियान का शुभारंभ किया गया। व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर स्वदेशी से जुड़े संदेश लगाए गए और इसे देशभर में आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।

गोयल ने कहा कि जब देश में उत्पादन बढ़ेगा तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, व्यापार का विस्तार होगा और आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत होगी। स्वदेशी उनके लिए बाजार की नीति से अधिक राष्ट्रनिर्माण का संकल्प है।

एमएसएमई से व्यापारी वर्ग को मिला नया आधार

उन्होंने कहा कि एमएसएमई व्यवस्था का लाभ अब केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहा। छोटे और खुदरा व्यापारियों को भी सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं।

उनके अनुसार चुनौती केवल योजनाएं बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें अंतिम लाभार्थी तक पहुंचाने की है। इसी उद्देश्य से व्यापारिक संगठनों के माध्यम से जिलों, कस्बों और बाजारों में व्यापारियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने का कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार नीति बनाती है, लेकिन नीति का वास्तविक लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना सामाजिक और व्यापारिक संगठनों की भी जिम्मेदारी है।

जीएसटी सुधारों को बताया व्यापार के लिए बड़ी राहत

जीएसटी में किए गए सुधारों को गोयल ने व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण राहत बताया। उन्होंने कहा कि विभिन्न वस्तुओं पर कर की दरों में कमी से व्यापार को सरल बनाने और उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि व्यापारियों की ओर से लंबे समय से उठाए जा रहे विषयों पर सरकार ने सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया है।

गोयल ने बताया कि व्यापारियों की समस्याओं और सुझावों को समझने के लिए राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों में संवाद कार्यक्रम किए गए। उनके अनुसार इन संवादों से प्राप्त सुझावों को सरकार तक पहुंचाया गया और व्यापारियों के हित से जुड़े विषयों को नीति-निर्माण के स्तर पर रखने का प्रयास किया गया।

डिजिटल भारत में व्यापारी को भी बदलना होगा

गोयल ने कहा कि बदलते भारत में व्यापार की सीमाएं अब बाजार या शहर तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल तकनीक ने एक छोटे व्यापारी को भी देश और दुनिया के ग्राहकों तक पहुंचने की क्षमता दी है।

उन्होंने कहा कि जो व्यापारी समय के साथ डिजिटल नहीं होगा, वह प्रतिस्पर्धा में पीछे रह सकता है। इसलिए व्यापारी वर्ग को नई तकनीक को चुनौती नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देखना चाहिए।

ओएनडीसी को बताया भारतीय व्यापार के लिए बड़ा अवसर

ऑनलाइन व्यापार के संदर्भ में उन्होंने ओएनडीसी जैसे भारतीय डिजिटल मंचों को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि डिजिटल माध्यमों ने छोटे व्यापारियों को बड़े ऑनलाइन बाजार में प्रवेश का अवसर दिया है।

उन्होंने राजस्थान में ओएनडीसी को लेकर आयोजित कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि जयपुर व्यापार महासंघ और राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के संयोजन में व्यापारियों को इस व्यवस्था से जोड़ने के लिए अभियान चलाया गया।

गोयल के अनुसार, भारतीय व्यापारी को डिजिटल बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी ही होगी। इससे निर्माता, थोक व्यापारी और खुदरा व्यापारी एक-दूसरे से अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ सकते हैं।

एआई को स्वीकार करना समय की आवश्यकता

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर गोयल का स्पष्ट मत है कि इसे अब टालना संभव नहीं। उन्होंने कहा कि एआई ने कार्य की गति और क्षमता दोनों को बदल दिया है।

उनके अनुसार जिस कार्य में पहले घंटों लगते थे, उन्हें एआई की सहायता से कम समय में किया जा सकता है। व्यापारियों को एआई के प्रति जागरूक करने के लिए सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि वे इसका सकारात्मक और उत्पादक उपयोग कर सकें।

उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ कुछ चुनौतियां स्वाभाविक हैं, लेकिन उसके लाभों को देखते हुए समाज और व्यापार जगत को एआई को समझकर अपनाना होगा।

युवा केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें

युवाओं के भविष्य पर उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा आबादी है। आज का युवा डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप और नवाचार के माध्यम से न केवल स्वयं के लिए अवसर पैदा कर सकता है, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार का माध्यम बन सकता है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल नौकरी पाने की मानसिकता तक सीमित न रहें, बल्कि नए विचारों और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार देने की दिशा में आगे बढ़ें।

उनके शब्दों में, सीमा पर खड़ा जवान देश की भौतिक सीमाओं की रक्षा करता है और देश का युवा नई तकनीक, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से भारत की आर्थिक शक्ति की रक्षा कर सकता है।

समाजसेवा को बताया जीवन का संकल्प

व्यापार के साथ समाजसेवा के प्रश्न पर गोयल ने इसे ईश्वर की देन और परिवार से मिली प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि बचपन से ही व्यापारिक गतिविधियों के साथ समाज के लिए कुछ करने की इच्छा रही।

उन्होंने बताया कि उनके पिता और बड़े भाई भी सामाजिक एवं व्यापारिक संगठनों से जुड़े रहे हैं। यही पारिवारिक संस्कार उनके जीवन में आगे बढ़े।

आज उनके व्यापार का विस्तार विभिन्न क्षेत्रों तक है, लेकिन वे समाजसेवा को अपनी प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक मानते हैं।

परिवार की एकता को बताया शक्ति

संयुक्त परिवार के महत्व पर गोयल ने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि परिवार की एकता ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति रही है। उन्होंने बताया कि पांच भाइयों और बहन का परिवार आज भी आपसी सहयोग और पारिवारिक एकता के साथ आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि व्यापार बढ़ता गया, उद्योग स्थापित होते गए, लेकिन परिवार की एकता और एक ही चूल्हे की परंपरा बनी रही। परिवार से मिले सहयोग ने उन्हें व्यापार और सामाजिक क्षेत्र में निरंतर काम करने की शक्ति दी।

महिला उद्यमिता को मिले प्रोत्साहन

गोयल ने कहा कि भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका तेजी से बदल रही है। आज महिलाएं उद्योग, स्टार्टअप, व्यापार और स्वरोजगार के क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध कर रही हैं।

उन्होंने व्यापारिक परिवारों से अपील की कि बेटियों और बहुओं को भी व्यवसाय में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर दिया जाए। उन्होंने अपने परिवार की महिलाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि नई पीढ़ी की महिलाएं स्वयं उत्पाद तैयार कर बाजार में उतार रही हैं और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं।

संस्कृति बचेगी तो समाज बचेगा

भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को लेकर गोयल ने कहा कि संस्कृति केवल परंपराओं का संग्रह नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली शक्ति है।

उन्होंने कहा कि भारतीय त्योहार परिवार और समाज को जोड़ते हैं तथा आर्थिक गतिविधियों को भी गति देते हैं। दीपावली, नवरात्रि और अन्य पर्वों के दौरान बाजारों में होने वाली गतिविधियां इसका प्रमाण हैं।

उनके अनुसार, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक चेतना एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं।

मतदान को बताया नागरिक धर्म

मतदाता जागरूकता के लिए चलाए गए अभियानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

जयपुर व्यापार महासंघ के माध्यम से लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान व्यापक जागरूकता अभियान चलाए गए। बाजारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में जाकर लोगों को मतदान के प्रति जागरूक किया गया।

उन्होंने कहा कि मत किसी भी राजनीतिक दल या प्रत्याशी को देना नागरिक का व्यक्तिगत अधिकार है, लेकिन मतदान करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति जिम्मेदारी है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी

पर्यावरण संरक्षण पर गोयल ने जल बचाने और वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जन्मदिन, विवाह और अन्य शुभ अवसरों को पौधारोपण से जोड़ना चाहिए।

उन्होंने विवाह जैसे अवसरों पर पौधा उपहार देने की परंपरा विकसित करने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि पर्यावरण ऐसा संसाधन है जिसे बाजार से खरीदा नहीं जा सकता, इसलिए उसकी रक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

स्वदेशी मैराथन से दिया आत्मनिर्भरता का संदेश

स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए आयोजित स्वदेशी मैराथन का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि इसका उद्देश्य लोगों में स्वदेशी के प्रति विश्वास और जागरूकता पैदा करना था।

उन्होंने कहा कि आज भारतीय उत्पाद गुणवत्ता, मजबूती और मूल्य—तीनों स्तरों पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारतीय उपभोक्ता को स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड में जिम्मेदारी को बताया अवसर

राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड का सदस्य बनाए जाने को अपने जीवन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक बताते हुए गोयल ने कहा कि इस मंच के माध्यम से उन्हें देशभर के व्यापारियों की समस्याओं को समझने और उन्हें सरकार तक पहुंचाने का अवसर मिला।

उन्होंने बताया कि राजस्थान में बड़ी संख्या में कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापारियों से संवाद किया गया और उनकी समस्याएं तथा सुझाव संकलित किए गए। उनका कहना है कि व्यापारी हितों से जुड़े विषयों को सरकार तक पहुंचाना और समाधान की दिशा में प्रयास करना उनके लिए पद से अधिक जिम्मेदारी का विषय है।

‘व्यापारी बने राष्ट्र की आर्थिक शक्ति’

भविष्य की व्यापारिक दिशा पर गोयल ने कहा कि भारत के व्यापारी को अब पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर डिजिटल, तकनीकी और वैश्विक बाजार की संभावनाओं को समझना होगा।

उन्होंने युवाओं से नए विचारों, डिजिटल तकनीक और एआई के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत का भविष्य केवल बड़ी कंपनियों से नहीं, बल्कि छोटे व्यापारी, उद्यमी, स्टार्टअप और युवा शक्ति से भी तय होगा।

उन्होंने कहा कि व्यापार को केवल व्यक्तिगत समृद्धि का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रनिर्माण की शक्ति के रूप में देखना होगा।

सुभाष गोयल के विचारों का सार यही है कि स्वदेशी से आत्मनिर्भरता, डिजिटल से विस्तार, एआई से गति और युवा शक्ति से भारत का आर्थिक भविष्य मजबूत हो सकता है। उनके अनुसार यदि व्यापारी, युवा, महिलाएं और समाज मिलकर अपनी भूमिका निभाएं तो भारत की आर्थिक यात्रा को नई ऊंचाई दी जा सकती है।