ताइवान की उपराष्ट्रपति के इटली दौरे पर चीन नाराज, ताइपे ने किया पलटवार

0

डेस्क : ताइवान के विदेश मंत्रालय ने उपराष्ट्रपति ह्सियाओ बी-खिम की इटली यात्रा को लेकर चीन की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा है कि बीजिंग को उनकी विदेश यात्रा या अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भागीदारी पर निर्देश देने का कोई अधिकार नहीं है। ताइवान के विदेश मंत्रालय ने यह प्रतिक्रिया चीन की ओर से इटली और यूरोपीय संघ के समक्ष विरोध दर्ज कराए जाने के बाद दी।

ताइवान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ह्सियाओ कुआंगवेई ने सेंट्रल न्यूज एजेंसी (CNA) से बातचीत में कहा कि यूरोपीय संसद की ओर से आमंत्रित कार्यक्रमों में उपराष्ट्रपति की भागीदारी को लेकर चीन कोई निर्देश नहीं दे सकता।

ह्सियाओ बी-खिम इटली के वेंटोटेने द्वीप पर आयोजित दूसरे वेंटोटेने यूरोपीय सम्मेलन फॉर फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी में हिस्सा ले रही हैं। यह सम्मेलन गुरुवार से शनिवार तक आयोजित किया जा रहा है। उनकी इटली यात्रा की जानकारी यूरोपीय संसद की उपाध्यक्ष और कार्यक्रम की प्रमुख आयोजक पिना पिचिएर्नो द्वारा दिए जाने के बाद सामने आई।

चीन ने इटली और यूरोपीय संघ से जताई आपत्ति

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने शुक्रवार को कहा कि बीजिंग ने ह्सियाओ की इटली यात्रा को लेकर इटली और यूरोपीय संघ के समक्ष गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि चीन ताइवान और उन देशों के बीच किसी भी तरह के आधिकारिक संपर्क का विरोध करता है, जिनके चीन के साथ राजनयिक संबंध हैं।

माओ ने चीन की ‘वन चाइना’ नीति को चीन-इटली और चीन-यूरोपीय संघ संबंधों की राजनीतिक नींव बताया।

विदेश मंत्री भी यात्रा में साथ

ताइवान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री लिन चिया-लुंग भी उपराष्ट्रपति ह्सियाओ के साथ इटली गए हैं। हालांकि मंत्रालय ने उनके यात्रा कार्यक्रम से जुड़ी अन्य जानकारी साझा करने से इनकार किया।

इस बीच, इंटर-पार्लियामेंटरी अलायंस ऑन चाइना (IPAC) के कार्यकारी निदेशक ल्यूक डी पुलफोर्ड ने ह्सियाओ की सम्मेलन में भागीदारी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ताइवान की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को सीमित करने के चीन के प्रयासों का जवाब यह होना चाहिए कि दुनिया ताइवान का स्वागत करे।

डी पुलफोर्ड ने कहा कि ताइवान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भाग लेने का अवसर देना केवल उसके राष्ट्रीय हितों से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि एक लोकतांत्रिक समाज को वैश्विक मंच से अलग-थलग किए जाने का विरोध भी है।