ताइवान विवाद: अमेरिका का स्पष्ट संदेश, नीति में कोई परिवर्तन नहीं

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डेस्क : अमेरिका और चीन के बीच उच्चस्तरीय वार्ता के बाद ताइवान को लेकर एक बार फिर वैश्विक कूटनीतिक तनाव सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया बैठक के बाद ताइवान मुद्दे पर दोनों देशों के रुख में कोई नरमी नहीं दिखी है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ताइवान को लेकर अमेरिका की नीति में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। एक साक्षात्कार में उन्होंने दोहराया कि वाशिंगटन अपनी पारंपरिक नीति पर ही कायम है।

रुबियो ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि चीन ने ताइवान की स्थिति को बलपूर्वक बदलने का प्रयास किया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं और यह क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी बड़ा खतरा साबित होगा।

बीजिंग में हुई ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत के दौरान ताइवान का मुद्दा प्रमुख रूप से उठा। चीन की ओर से इस विषय पर सख्त रुख अपनाते हुए संकेत दिया गया कि ताइवान को लेकर कोई भी बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

हालांकि अमेरिकी पक्ष की ओर से जारी आधिकारिक बयान में ताइवान का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया गया, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि दोनों देश इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी-अपनी पुरानी स्थिति पर ही कायम हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका लंबे समय से ताइवान को लेकर “रणनीतिक अस्पष्टता” की नीति अपनाए हुए है—जिसमें वह न तो चीन के दावे को पूरी तरह स्वीकार करता है और न ही ताइवान को औपचारिक रूप से स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देता है।

इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें एक बार फिर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर टिक गई हैं, जहां अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है।

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