डेस्क : तिब्बत क्षेत्र में शुक्रवार तड़के 3.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप भारतीय समयानुसार सुबह करीब 4 बजकर 2 मिनट पर आया। भूकंप का केंद्र 28.365 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 87.594 डिग्री पूर्वी देशांतर पर जमीन से 30 किलोमीटर की गहराई में था।
NCS ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भूकंप की जानकारी साझा करते हुए बताया कि 11 सितंबर 2026 को सुबह 04:02:54 बजे 3.7 तीव्रता का झटका महसूस किया गया। फिलहाल भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की तत्काल सूचना नहीं है।
नेपाल में बाढ़ से तबाही, मृतकों की संख्या 1,377 पहुंची
तिब्बत में भूकंप की यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब पड़ोसी देश नेपाल पिछले महीने आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से उबरने की कोशिश कर रहा है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,377 हो गई है।
चितवन सबसे अधिक प्रभावित जिला रहा, जहां 364 लोगों की मौत हुई है। इसके बाद नवलपरासी पूर्व में 228, नवलपरासी पश्चिम में 222, नुवाकोट में 198, रसुवा में 178, गोरखा और धादिंग में 70-70 तथा तनाहुन में 38 लोगों की जान गई है। काठमांडू में उपचार के दौरान दो लोगों की मौत हुई।
5,130 लोग अब भी लापता
NDRRMA के अनुसार, राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 13,656 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। हालांकि 5,130 लोग अब भी लापता हैं। इनमें स्थानीय नागरिकों के अलावा सरकारी कर्मचारी, वित्तीय संस्थानों के कर्मचारी, विदेशी नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 104 लोगों की पहचान होने के बाद लापता लोगों की सूची में कमी आई है।
आपदा के कारण हजारों लोग अभी भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। नुवाकोट, रसुवा और धादिंग में बनाए गए 37 होल्डिंग सेंटरों में करीब 3,685 लोग शरण लिए हुए हैं।
21 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में जुटे
नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के लिए नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 21,063 जवान तैनात किए गए हैं। सुरक्षाकर्मी मलबा हटाने के साथ-साथ सुरंगों और नदी किनारे फंसे लोगों को निकालने तथा जरूरी सामान की आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटे हैं।
हवाई राहत अभियान के तहत अब तक 1,600 से अधिक हेलीकॉप्टर उड़ानें संचालित की जा चुकी हैं। इनके जरिए राहत सामग्री पहुंचाने के साथ गंभीर रूप से घायल लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है।
नेपाल को आर्थिक और चिकित्सकीय मदद
आपदा के बाद नेपाल सरकार ने तत्काल सहायता के तौर पर रसुवा और नुवाकोट को एक-एक करोड़ नेपाली रुपये, धादिंग को 50 लाख रुपये तथा 15 गंभीर रूप से प्रभावित स्थानीय निकायों को कुल 13.5 करोड़ नेपाली रुपये की सहायता जारी की है।
वहीं, प्रभावित लोगों की मदद के लिए 150 से अधिक चिकित्सकीय और मनोसामाजिक विशेषज्ञों को तैनात किया गया है। बरामद शवों की पहचान के लिए पुलिस परिजनों से डीएनए नमूने और सत्यापन दस्तावेज भी एकत्र कर रही है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत लगातार राहत और बचाव अभियान में सहयोग कर रहा है। भारतीय वायुसेना का आठवां विमान बुधवार को मानवीय सहायता लेकर काठमांडू पहुंचा।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 26 अगस्त से अब तक भारत ने आठ विशेष उड़ानों के जरिए नेपाल को 130 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी है। इसके अलावा भारत ने बचाव, राहत और फोरेंसिक अभियानों में सहयोग के लिए 54 विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा है।
भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री में अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयों के अलावा सुरंग और मलबा बचाव अभियान के लिए विशेष उपकरण शामिल हैं। इनमें मड रेस्क्यू सूट, गैस डिटेक्टर, ब्रीदिंग अपरेटस, इन्फ्लेटेबल वॉकवे, डीएनए किट और प्रोफाइलिंग से जुड़े उपकरण शामिल हैं।
इसके अलावा पोर्टेबल जनरेटर, लाइटिंग टावर और पानी निकालने वाले पंप भी नेपाल भेजे गए हैं।
चिलिमे में केंद्रित भारतीय टीम का अभियान
भारतीय विशेष सुरंग बचाव दल ने नेपाली सेना के साथ समन्वय में चिलिमे और लांगटांग में अभियान शुरू किया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल खोज और बचाव अभियान चिलिमे पर केंद्रित है। यहां दुर्गम भूभाग, सीमित पहुंच और सुरंग की ढलान राहत एवं बचाव कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना रही है।
एक ओर तिब्बत में भूकंप के झटके ने हिमालयी क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ाई है, वहीं नेपाल में जारी व्यापक राहत और बचाव अभियान क्षेत्र के सामने मौजूद प्राकृतिक आपदाओं की गंभीर चुनौती को रेखांकित करता है।








