तुर्की में LGBTQ+ समूहों पर छापेमारी, 162 संदिग्धों की जांच

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डेस्क: तुर्की में LGBTQ+ समुदाय और उससे जुड़े संगठनों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई तेज हो गई है। रविवार तड़के पुलिस ने इस्तांबुल, अंकारा, इजमिर, आयदीन और मर्सिन समेत कई प्रमुख शहरों में एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान LGBTQ+ अधिकारों और HIV जागरूकता से जुड़े संगठनों के वर्तमान और पूर्व सदस्यों समेत दर्जनों लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।

तुर्की के न्याय मंत्री अकिन गुरलेक ने सोशल मीडिया पर बताया कि कार्रवाई 162 संदिग्धों, नौ संगठनों और 13 कारोबारियों से जुड़ी जांच के तहत की गई। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य बच्चों, परिवार की संस्था और सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा करना है। गुरलेक ने राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन द्वारा परिवार और बच्चों से संबंधित जारी किए गए 10 वर्षीय कार्यकारी आदेश का भी हवाला दिया।

गुरलेक ने कहा कि संविधान के तहत परिवार और बच्चों की रक्षा करना राज्य का दायित्व है और बच्चों, युवाओं या परिवारों को निशाना बनाने वाली किसी भी आपराधिक गतिविधि, शोषण के नेटवर्क या गैरकानूनी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

छापेमारी के दौरान कई LGBTQ+ अधिकार संगठनों के कार्यालयों और लोकप्रिय ठिकानों की तलाशी ली गई। संबंधित संगठनों की वेबसाइटों को भी ब्लॉक किए जाने की खबर है। न्याय मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि इन संगठनों को अंतरराष्ट्रीय स्रोतों और एजेंसियों से महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता मिलती रही है।

हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने सरकार की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। मानवाधिकार संघ ने आरोप लगाया कि यह बच्चों और परिवार की सुरक्षा के नाम पर LGBTQ+ समुदाय और स्वतंत्र नागरिक समाज को निशाना बनाने वाला राजनीतिक अभियान है। संगठन ने कहा कि आपराधिक संगठन बनाने, नशीले पदार्थ, वेश्यावृत्ति और अश्लीलता जैसे आरोपों को जोड़कर पूरे समुदाय को अपराधी के तौर पर पेश करने की कोशिश की जा रही है।

तुर्की में सत्तारूढ़ धार्मिक रूढ़िवादी जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (AKP) के नेतृत्व वाली सरकार पर LGBTQ+ समुदाय के खिलाफ लगातार सख्त रुख अपनाने के आरोप लगते रहे हैं। वर्ष 2015 में इस्तांबुल प्राइड पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इससे पहले इस आयोजन में हजारों लोग शामिल होते थे। प्रतिबंध के बाद प्राइड से जुड़े कई प्रयासों को पुलिस ने बलपूर्वक रोक दिया।

हाल के वर्षों में LGBTQ+ समुदाय से संबंधित आयोजनों पर प्रतिबंध और कार्रवाई जारी रही है। इस गर्मी में भूमध्यसागर में संचालित एक LGBTQ+ क्रूज जहाज को भी तुर्की में बंदरगाह पर पहुंचने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि वह पहले कई बार तुर्की आ चुका था।

इतिहास की बात करें तो आधुनिक तुर्की गणराज्य से पहले के ऑटोमन साम्राज्य ने 1858 में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। हालांकि, देश में LGBTQ+ समुदाय को अब भी सामाजिक भेदभाव और सरकारी सख्ती का सामना करना पड़ता है।