उमर अब्दुल्ला ने पीओके के हालात पर साधा निशाना, 1947 का नारा दोहराया

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श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी पीओके के मौजूदा हालात का जिक्र करते हुए 80 साल पुराने घटनाक्रम को याद किया। उन्होंने कहा कि सीमा पार के हालात देखकर आज उन्हें लगता है कि करीब 80 साल पहले भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के विलय का फैसला सही था।

श्रीनगर में स्वतंत्रता दिवस समारोह में तिरंगा फहराने के बाद उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जब वह नियंत्रण रेखा के उस पार के हालात देखते हैं तो उन्हें महसूस होता है कि उस समय ‘हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार’ का नारा लगाने वाले लोग सही थे। उन्होंने कहा कि उन लोगों ने जो बलिदान दिया, वह सही मकसद के लिए था।

पीओके के लोगों को बताया अपना

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नियंत्रण रेखा के उस पार रहने वाले लोग भारत के लिए अजनबी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पीओके के लोगों को जम्मू-कश्मीर के लोग अपना मानते हैं।

उन्होंने कहा कि पीओके में मौजूदा परिस्थितियों को देखकर उन्हें दुख और चिंता होती है। उमर ने दावा किया कि अगर 2019 में जम्मू-कश्मीर की परिस्थितियों में बदलाव नहीं किया गया होता, तो संभव है कि आज सीमा पार के लोग भारत के साथ दोबारा जुड़ने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे होते।

विधानसभा में पीओके के लिए 24 सीटें

मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीओके के लिए आरक्षित सीटों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन सीटों को आज भी खाली रखा गया है और उम्मीद है कि किसी दिन सीमा पार के लोग इन सीटों पर आकर प्रतिनिधित्व करेंगे।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीओके के लिए 24 सीटें निर्धारित हैं, जिन पर मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव नहीं होते।

2019 के बदलाव का भी जिक्र

उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में 2019 में जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक ढांचे में किए गए बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा उस समय किए गए बदलावों के बाद जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे और राज्य के दर्जे से जुड़े मुद्दे आज भी राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा और पहले के संवैधानिक अधिकार बहाल करने की मांग दोहराई। साथ ही लोकतंत्र और संघवाद को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

‘हमलावर खबरदार’ के नारे का किया जिक्र

उमर अब्दुल्ला के भाषण में 1947 के उस दौर का खास उल्लेख रहा, जब पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावरों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला किया था। उन्होंने उस समय कश्मीरियों की ओर से किए गए प्रतिरोध और बलिदान को याद करते हुए कहा कि आज पीओके की स्थिति देखकर 80 साल पुराने फैसले की सही होने की भावना और मजबूत होती है।