डेस्क : यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किए जाने को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के इस कदम पर सवाल उठाते हुए यूपीआई पर प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था को वापस लेने की मांग की है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने का रास्ता खोला गया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की ओर से लंबे समय से भारत की शून्य-एमडीआर व्यवस्था पर आपत्ति जताई जाती रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिकी दबाव में इस व्यवस्था में बदलाव कर रही है।
उन्होंने कहा कि यूपीआई भारत में डिजिटल भुगतान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका आसान और कम लागत वाला होना है। राहुल गांधी ने आशंका जताई कि व्यापारियों पर शुल्क का असर आगे चलकर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है।
वहीं, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर ग्राहकों पर लगाया जाने वाला कोई टैक्स नहीं है। सरकार के अनुसार, प्रस्तावित शुल्क केवल निर्धारित मर्चेंट लेनदेन पर लागू होगा। व्यक्तिगत रूप से किए जाने वाले यूपीआई भुगतान निशुल्क रहेंगे। इसके अलावा 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान पर भी शुल्क नहीं लगेगा।
सरकार के मुताबिक, करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट यूपीआई लेनदेन नए एमडीआर ढांचे से प्रभावित नहीं होंगे। 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर निर्धारित किया गया है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है।
केंद्र का कहना है कि एमडीआर से प्राप्त राशि डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और यूपीआई ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित की जाएगी। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे और साइबर सुरक्षा समेत आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करना है।
यूपीआई शुल्क व्यवस्था में यह बदलाव 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने की बात कही गई है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच यूपीआई की भविष्य की शुल्क व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है।








