अवैध हिरासत पर हाईकोर्ट सख्त, यूपी पुलिस को फटकार- ‘आपको शर्म आनी चाहिए’

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डेस्क : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने के मामले में नोएडा पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में पुलिस की हालत बेहद खराब है और अधिकारियों को लगता है कि वे कुछ भी कर सकते हैं और बच निकलेंगे। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने संबंधित पुलिस अधिकारियों से मौखिक रूप से कहा, “आपको शर्म आनी चाहिए।”

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ गौतम बुद्ध नगर निवासी दीपक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में नोएडा के फेज-2 थाने में दर्ज एक मामले के संबंध में पुलिस हिरासत को चुनौती दी गई थी।

मामले के अनुसार, 23 अगस्त को दो गुटों के बीच हिंसा की घटना के बाद दीपक समेत कुछ लोगों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत हिरासत में लिया गया था। कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड से पता चला कि प्राथमिकी दर्ज होने से पहले ही याचिकाकर्ता पुलिस की हिरासत में था और बाद में उसी हिरासत के दौरान उसे प्राथमिकी में औपचारिक रूप से गिरफ्तार दिखाया गया।

कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया के तहत दिए जाने वाले नोटिस के समय को लेकर भी विसंगतियां थीं। अदालत ने पुलिस से गिरफ्तारी और जमानत संबंधी दस्तावेजों के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल किए।

खंडपीठ ने कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के वकील से मिलने के अधिकार की जानकारी भी नहीं दी गई। पुलिस रिकॉर्ड में जमानत राशि और संबंधित प्रक्रिया के पर्याप्त दस्तावेजीकरण का अभाव पाए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की हिरासत को गैरकानूनी मानते हुए उसकी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार कर ली और तत्काल रिहाई का आदेश दिया। अदालत ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर अधिकारियों को जवाबदेह ठहराते हुए प्रक्रिया के पालन पर गंभीर टिप्पणी की।