जयपुर : मालवीय नगर स्थित अणुविभा केन्द्र में बुधवार को मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी का मंगल पदार्पण हुआ। इस अवसर पर आयोजित दो स्मृति सभाओं में संतों के मंगल सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा आध्यात्मिक प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया।
अपने प्रेरक प्रवचन में मुनिश्री तत्त्व रुचि ‘तरुण’ ने जीवन की क्षणभंगुरता का स्मरण कराते हुए कहा कि “सांसों का कोई भरोसा नहीं है। इसलिए धर्म-ध्यान, जप, तप, स्वाध्याय और प्रभु भक्ति में कभी प्रमाद नहीं करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि मृत्यु जीवन का अटल सत्य है, किंतु जो व्यक्ति धर्ममय जीवन जीता है, वह मृत्यु के भय से मुक्त होकर जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझ लेता है। धर्म और साधना ही मनुष्य को मानसिक शांति तथा आत्मिक बल प्रदान करते हैं।
मुनिश्री संभव कुमार जी ने भी अपने उद्बोधन में कहा कि इस संसार में जो आया है, उसका जाना निश्चित है। कोई पहले जाता है तो कोई बाद में, किंतु मृत्यु अवश्यंभावी है। उन्होंने कहा कि इस शाश्वत सत्य को स्वीकार कर मोह-ममता से ऊपर उठने का प्रयास ही मनुष्य को दुःखों से मुक्ति की ओर ले जाता है।
कार्यक्रम के दौरान ‘वीणा कैसेट्स’ के प्रणेता एवं राजस्थानी लोकसंस्कृति के संवाहक स्वर्गीय केसरीचंद जी मालू की स्मृति सभा आयोजित की गई। वक्ताओं ने उनके सांस्कृतिक योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने राजस्थानी लोकगीतों और लोक संस्कृति को देश-विदेश तक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभा का संचालन एवं स्व. मालू के जीवन परिचय का वाचन राजकुमार बरड़िया ने किया, जबकि परिवार की महिलाओं ने सामूहिक स्मृति गीत प्रस्तुत कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर आचार्य श्री महाश्रमण सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों एवं संस्थाओं के श्रद्धांजलि संदेश भी प्राप्त हुए।
इससे पूर्व बीकानेर मूल निवासी एवं जयपुर प्रवासी स्वर्गीय श्रीमती बसंता देवी सुखाणी की स्मृति सभा भी मुनिश्री के सान्निध्य में आयोजित हुई, जिसमें समाजजनों ने दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा का संचालन सुरेश कुमार बरड़िया ने किया।
कार्यक्रम के अंत में तेरापंथी सभा के अध्यक्ष शांतिलाल गोलछा ने दोनों शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि धर्म और संतों का सान्निध्य जीवन के कठिन क्षणों में धैर्य और आत्मबल प्रदान करता है। उन्होंने समाज की ओर से दिवंगत आत्माओं के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की तथा परिजनों को इस वियोग को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की मंगलकामना की।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं समाजजनों की उपस्थिति में आयोजित यह आध्यात्मिक एवं श्रद्धांजलि सभा धर्म, वैराग्य और जीवन के शाश्वत सत्य का संदेश देकर संपन्न हुई।








