रसोई गैस पर नए शुल्क की तैयारी नहीं, हरदीप पुरी ने अटकलों को किया खारिज

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नई दिल्ली : रसोई गैस पर किसी नए शुल्क या लेवी लगाए जाने की अटकलों को केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर पर फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। पुरी 7वें CII इंटरनेशनल एनर्जी कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।

मंत्री ने मीडिया में चल रही अटकलों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले अपुष्ट खबरें सामने आती हैं और फिर उनसे उस पर प्रतिक्रिया मांगी जाती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई ठोस जानकारी हो तो उनके सामने रखी जाए, लेकिन उन्हें ऐसे किसी प्रस्ताव की जानकारी नहीं है।

ई20 पेट्रोल को लेकर भी दी सफाई

पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी ई20 को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पुरी ने देश के ईंधन वितरण नेटवर्क को मजबूत और भरोसेमंद बताया। उन्होंने कहा कि हालिया वैश्विक बाजार संकट और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बावजूद देश में ईंधन की उपलब्धता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।

पुरी के मुताबिक, पेट्रोल पंपों पर ईंधन की गुणवत्ता की जांच के लिए तेल विपणन कंपनियों ने देशभर में विशेष टीमें तैनात की थीं। इन टीमों ने रोजाना करीब 2,000 नमूनों की जांच की। देशभर में करीब 1.07 लाख रिटेल आउटलेट हैं, जहां प्रतिदिन 6 से 7 करोड़ ग्राहक पहुंचते हैं। इतने बड़े नेटवर्क में जांच के दौरान केवल चार मामलों में संदूषण की पुष्टि हुई।

उन्होंने कहा कि कुछ पक्ष इन आंकड़ों को संदर्भ से अलग करके पेश कर रहे हैं।

2014 के बाद पेट्रोल पंपों की संख्या दोगुनी से अधिक

पुरी ने कहा कि वर्ष 2014 में देश में करीब 52,000 ईंधन रिटेल आउटलेट थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर लगभग 1.07 लाख हो गई है। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति संबंधी दबाव के बावजूद देश के किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन का स्टॉक खत्म नहीं हुआ।

उन्होंने इसका श्रेय कच्चे तेल की विविध स्रोतों से खरीद, मजबूत बुनियादी ढांचे, अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों, तकनीकी सुधार और रणनीतिक भंडार को दिया। उनके अनुसार भारत के पास फिलहाल करीब 74 दिनों की रिजर्व क्षमता है।

भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरत पर जोर

पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता और आयातक तथा चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग देश है। देश की ऊर्जा मांग वैश्विक औसत की तुलना में करीब तीन गुना तेजी से बढ़ रही है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुमान का हवाला देते हुए पुरी ने कहा कि 2050 तक वैश्विक तेल मांग में होने वाली वृद्धि में भारत की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत हो सकती है। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत यूरोप और अमेरिका में रिफाइनिंग क्षमता में कमी आ रही है। यूरोप में करीब 2 लाख बैरल प्रतिदिन की रिफाइनिंग क्षमता घट रही है, जबकि अमेरिका में पिछले 50 वर्षों में कोई नई रिफाइनरी शुरू नहीं हुई है।

घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर 55 हजार टन प्रतिदिन किया

एलपीजी आपूर्ति को लेकर भी पुरी ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास खाड़ी देशों से आपूर्ति को लेकर पैदा हुई चिंताओं के बीच भारत ने घरेलू उत्पादन बढ़ाया। घरेलू एलपीजी उत्पादन करीब 34,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 55,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन किया गया। इसके लिए रिफाइनरियों के उत्पादन में भी बदलाव किया गया।

उन्होंने बताया कि अब अमेरिका भारत के एलपीजी आयात का करीब 67 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध करा रहा है। इससे खाड़ी क्षेत्र पर भारत की निर्भरता कम हुई है।

मुंबई हाई में उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

पुरी ने मुंबई हाई क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के लिए ओएनजीसी, ब्राजील की पेट्रोब्रास और बीपी के बीच सहयोग का भी उल्लेख किया। मुंबई हाई की खोज 1974 में हुई थी। सरकार इस परियोजना में ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत तक वहन करेगी, हालांकि प्रति कुएं इसकी अधिकतम सीमा करीब 650 करोड़ रुपये होगी।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी सरकार का पक्ष

ईंधन की कीमतों पर पुरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण हाल के वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मामूली वृद्धि हुई है। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से नवंबर 2021, मई 2022 और मार्च 2026 में की गई उत्पाद शुल्क में कटौती से कुल मिलाकर करीब 10 रुपये प्रति लीटर का राहत प्रभाव पड़ा है।

उन्होंने कहा कि इसके चलते भारत में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें दुनिया के कई देशों की तुलना में अब भी अपेक्षाकृत कम हैं और पड़ोसी देशों के साथ-साथ कई यूरोपीय देशों से भी कम हैं।

पुरी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं अभी बनी हुई हैं, लेकिन भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं और आने वाली चुनौतियों से निपटने की स्थिति में है।