डेस्क : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने शुक्रवार को संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन करने को लेकर कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का प्रदर्शन छात्रों या न्याय के लिए नहीं, बल्कि मीडिया में बने रहने और राजनीतिक ध्यान भटकाने की कोशिश है।
नड्डा ने कहा कि 20 जुलाई की घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही संज्ञान ले चुका है और मामले की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित की जा चुकी है। ऐसे में राहुल गांधी का पुलिस थाने के बाहर कैमरों के सामने बैठना केवल ‘कैमरा केंद्रित राजनीति’ है।
उन्होंने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत मामले की जांच कर रही है, फिर राहुल गांधी पुलिस थाने के बाहर धरना देकर क्या साबित करना चाहते हैं। नड्डा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता सस्ती और ध्यान खींचने वाली राजनीति कर रहे हैं।
नड्डा ने कांग्रेस पर ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे को लेकर हो रही आलोचना से ध्यान भटकाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर देशभर में आलोचना का सामना कर रही है और इसी से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा किया है।
पीड़ित ने एफआईआर दर्ज नहीं होने का लगाया आरोप
इस बीच संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन से घायल साहिल लोचव ने आरोप लगाया कि उसकी शिकायत के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की है। साहिल के अनुसार, 20 जुलाई को पेलेट गन से फायरिंग में उसकी आंख में चोट लगी थी। उसे पहले लेडी हार्डिंग अस्पताल ले जाया गया, जहां से एम्स रेफर किया गया। एम्स में उसकी सर्जरी हुई, लेकिन अब भी उसकी आंख की रोशनी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
साहिल ने बताया कि उसने 14 अगस्त को सात पन्नों की शिकायत अपने वकील के माध्यम से दी थी, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी की मांग स्पष्ट है—एफआईआर दर्ज की जाए और उसका नंबर दिया जाए। उन्होंने कहा कि साहिल की शिकायत पर कार्रवाई की मांग को राहुल गांधी आवाज दे रहे हैं और जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होती, कांग्रेस नेता संसद मार्ग थाने से नहीं हटेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने गठित की पांच सदस्यीय समिति
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 20 जुलाई की घटनाओं और प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई तथा प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई हिंसा के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त विशेषज्ञ समिति गठित की थी। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी करेंगे।
समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी एलआर बिश्नोई शामिल हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने समिति को पुलिस द्वारा बल के कथित अत्यधिक इस्तेमाल, प्रदर्शनकारियों की हिंसा तथा महिला प्रदर्शनकारियों से कथित दुर्व्यवहार और छेड़छाड़ जैसे आरोपों की जांच को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।
अदालत ने समिति को प्रदर्शनों में घायल पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों को अंतरिम मुआवजा दिए जाने की संभावना पर भी विचार करने की अनुमति दी है। समिति अपनी जांच के अंतरिम निष्कर्ष समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान रिकॉर्ड किए गए सीसीटीवी फुटेज और पुलिस व सुरक्षा बलों के बॉडी-कैमरा फुटेज भी समिति को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि समिति के गठन से पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय या अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से नहीं रोका जाएगा।








