नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद नदी किनारे मिले सैकड़ों शव, महामारी का खतरा मंडराया

0

डेस्क : नेपाल में हाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद तबाही का मंजर अब और भयावह होता जा रहा है। बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही नदियों के किनारे बड़ी संख्या में शव बरामद हो रहे हैं। कई शवों की हालत बेहद खराब होने के कारण उनकी पहचान करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। वहीं, खुले में पड़े शवों के कारण प्रभावित इलाकों में संक्रामक बीमारियों और महामारी का खतरा भी बढ़ गया है।

बताया जा रहा है कि बाढ़ की तेज धार में बहकर कई शव दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच गए हैं। चितवन सहित कई क्षेत्रों में नदी के किनारों पर बड़ी संख्या में शव मिलने की खबर है। इनमें कई शव ऐसे हैं, जिनकी अब तक पहचान नहीं हो पाई है। प्रशासन और राहत दल शवों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ उनकी पहचान की प्रक्रिया में जुटे हैं।

डीएनए से होगी मृतकों की पहचान

बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई परिवार अपने परिजनों को अब तक तलाश रहे हैं। अधिकारियों के सामने एक बड़ी चुनौती अज्ञात शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाना है। इसके लिए शवों के डीएनए नमूने सुरक्षित किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में परिजनों के डीएनए से मिलान कर पहचान की जा सके।

अस्पतालों और शवगृहों पर भी दबाव बढ़ गया है। बड़ी संख्या में शव पहुंचने के कारण उन्हें सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ रही है। कई स्थानों पर शवों को रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने की स्थिति सामने आई है।

सामूहिक दफन की स्थिति

अज्ञात शवों की बढ़ती संख्या और उनके तेजी से खराब होने के कारण प्रशासन को कुछ स्थानों पर सामूहिक दफन की व्यवस्था करनी पड़ी है। अधिकारियों का कहना है कि शवों को लंबे समय तक खुले में रखना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान मृतकों की पहचान से जुड़े रिकॉर्ड और नमूने सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा रहा है।

दूषित पानी से बीमारी का खतरा

विशेषज्ञों और स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता अब बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों को लेकर भी बढ़ गई है। शवों के सड़ने, गंदगी और दूषित पानी के कारण प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने लोगों को दूषित पानी से बचने, स्वच्छता बनाए रखने और बिना जांच के पानी का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है।

नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है। कई इलाकों में सड़क और संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण राहत दलों को पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।