नई दिल्ली : भारत ने एक बार फिर रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अपनी स्पष्ट नीति दोहराते हुए कहा है कि संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए निकलेगा। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि भारत रूस और यूक्रेन, दोनों के संपर्क में है और युद्ध को समाप्त कराने में किसी भी तरह की मदद के लिए तैयार है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने द्विसाप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया यूक्रेन और पोलैंड यात्रा का मुख्य उद्देश्य बातचीत और कूटनीति की संभावनाओं को तलाशना था। उन्होंने कहा कि भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि “यह युद्ध का युग नहीं है।”
जायसवाल के मुताबिक, जयशंकर ने अपनी बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश को भी दोहराया कि अंतहीन युद्ध को अब युद्ध की समाप्ति का रास्ता देना चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्ध में शामिल पक्षों को ही समाधान का रास्ता तलाशना होगा, लेकिन अगर भारत किसी भी रूप में मदद कर सकता है तो वह इसके लिए तैयार है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत रूस और यूक्रेन दोनों पक्षों के संपर्क में है और ऐसे विचार एवं सुझाव तलाशने की कोशिश कर रहा है, जो संघर्ष को समाप्त करने में योगदान दे सकें।
कीव में जेलेंस्की और यूक्रेनी विदेश मंत्री से मिले जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 3 सितंबर को यूक्रेन की राजधानी कीव का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से मुलाकात की और राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से भी मुलाकात की।
जयशंकर ने बातचीत के दौरान भारत की पुरानी नीति को दोहराते हुए कहा कि युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेगा। उन्होंने बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान तलाशने पर जोर दिया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर की यात्रा का प्रमुख उद्देश्य रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति की संभावनाओं पर चर्चा करना था।
ब्रिक्स सम्मेलन में भी उठेगा रूस-यूक्रेन युद्ध का मुद्दा
विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विभिन्न देशों के नेताओं के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठकों में रूस-यूक्रेन संघर्ष भी चर्चा के मुद्दों में शामिल रहेगा।
जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री सम्मेलन के दौरान कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। हालांकि, इन बैठकों में शामिल होने वाले नेताओं और उनके समय की विस्तृत जानकारी बाद में साझा की जाएगी।
रूसी सेना में अभी करीब दो दर्जन भारतीय
रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की मौजूदगी के मुद्दे पर विदेश मंत्रालय ने बताया कि अभी करीब दो दर्जन भारतीय रूसी सेना में बने हुए हैं। भारत ने उनकी जल्द रिहाई के लिए रूसी सरकार के समक्ष मामला उठाया है।
इससे पहले 31 अगस्त को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया था कि कुल 227 भारतीय नागरिक रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती हुए थे। इनमें से 139 को सेवा से मुक्त किया जा चुका है, जबकि 51 भारतीयों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा था कि शेष भारतीयों की रिहाई और स्वदेश वापसी के लिए भारत लगातार रूस के संपर्क में है।
रूस ने भी भारत की पहल का किया स्वागत
इस बीच रूस ने भी भारत के रुख का स्वागत किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का इच्छुक है और इस मुद्दे पर भारत की स्थिति काफी हद तक रूस के रुख के अनुरूप है।
पेस्कोव ने कहा कि रूस भारत की स्थिति से परिचित है और वह यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए शांतिपूर्ण रास्ता अपनाने के पक्ष में है। उन्होंने भारत की ओर से समाधान की दिशा में योगदान देने की इच्छा का भी स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच आगामी द्विपक्षीय बैठक में यूक्रेन युद्ध और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा का अवसर मिलेगा। पेस्कोव के मुताबिक, बैठक में पुतिन प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन युद्ध और मौजूदा हालात की जानकारी देंगे तथा दोनों नेता अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।








