यूएनएचआरसी में सिंध के मानवाधिकारों का मुद्दा उठा, आत्मनिर्णय के अधिकार की मांग

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डेस्क : संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 63वें सत्र में ब्रिटेन और यूरोप में वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस से जुड़े सिंधी राजनीतिक कार्यकर्ता व आयोजक डॉ. हिदायत भुट्टो ने सिंध में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने सिंधी लोगों के लिए आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान किए जाने की मांग की।

परिषद को संबोधित करते हुए भुट्टो ने कहा कि सिंध में मानवाधिकारों से जुड़ा संकट सिंधी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार से कथित इनकार से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सिंधियों की अपनी अलग मातृभूमि, भाषा, संस्कृति और सामूहिक पहचान है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर वाचा (आईसीसीपीआर) तथा आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों पर वाचा (आईसीईएससीआर) के साझा अनुच्छेद-1 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें लोगों को अपनी राजनीतिक स्थिति तय करने तथा आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास का अधिकार दिया गया है।

भुट्टो ने आरोप लगाया कि सिंध के लोग अपनी जमीन, जल संसाधनों और भविष्य से जुड़े फैसलों में लगातार हाशिये पर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेल, कृषि, उद्योग और ऊर्जा संसाधनों में योगदान के बावजूद सिंध की बड़ी आबादी गरीबी, असुरक्षित पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और सीमित शैक्षणिक अवसरों जैसी समस्याओं का सामना कर रही है।

उन्होंने सिंधु नदी के जल के कथित diversion, भूमि कब्जाने और सिंधु डेल्टा के विनाश का मुद्दा भी उठाया। इसके अलावा उन्होंने कथित जबरन गुमशुदगी और सिंधी हिंदू लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर भी चिंता जताई।

भुट्टो ने कहा कि आत्मनिर्णय कोई ऐसा विशेषाधिकार नहीं है, जिसे राज्य अपनी इच्छा से प्रदान करे, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून में मान्यता प्राप्त मौलिक अधिकार है। उन्होंने मानवाधिकार परिषद से पाकिस्तान से कथित दमन समाप्त करने और सिंधी लोगों को अपने राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक भविष्य को निर्धारित करने के अधिकार का सम्मान करने का आह्वान किया।