फ्लाईदुबई विमान हमले पर बड़ा दावा, इजरायल की पूर्व उप विदेश मंत्री ने जताई गंभीर चिंता

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डेस्क : फ्लाईदुबई की उड़ान के कॉकपिट में हुए कथित हमले को लेकर इजरायल में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। इजरायल की पूर्व उप विदेश मंत्री शारेन हस्केल ने कहा है कि यदि विमान के कॉकपिट में मौजूद लोगों ने समय रहते स्थिति को नहीं संभाला होता, तो यह घटना इजरायल में 9/11 जैसी भयावह त्रासदी का रूप ले सकती थी। उन्होंने हमलावर सह-पायलट के ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से संभावित संबंधों को भी गंभीर चिंता का विषय बताया।

एएनआई से बातचीत में हस्केल ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की टिप्पणियों से ऐसे संकेत मिले हैं कि सह-पायलट के कट्टरपंथी ईरानी तत्वों से संबंध हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि ये संबंध जांच में सामने आते हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला होगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता होगी।

हस्केल ने कहा कि विमान यदि इजरायल के और करीब पहुंच जाता तथा कॉकपिट पर नियंत्रण हासिल नहीं किया जाता, तो उसके किसी आबादी वाले क्षेत्र या महत्वपूर्ण इमारत से टकराने की आशंका थी। उन्होंने विमान के यात्रियों में शामिल 23 बच्चों का उल्लेख करते हुए कहा कि समय रहते विमान को संभालने वाले लोगों ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया।

उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों की बढ़ती गतिविधियों पर भी चिंता जताई। हस्केल के मुताबिक, कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित संगठन विभिन्न समुदायों और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की हिंसक विचारधारा का खतरा केवल इजरायल तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंदू, यहूदी, ईसाई, कुर्द, अलावी और द्रूज सहित कई समुदाय इससे प्रभावित हो सकते हैं।

ईरान पर क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने की कोशिश का आरोप

हस्केल ने दावा किया कि हाल के महीनों में ईरान के प्रभाव और शक्ति में कमी आई है और ऐसे में तेहरान क्षेत्र में अपना प्रभाव फिर से स्थापित करने के लिए नए तरीके तलाश रहा है। उन्होंने कहा कि इजरायल को संभावित खतरों को समझने के लिए खुफिया सूचनाओं को मजबूत करने और संभावित रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है।

इजरायल और अरब देशों के बीच बढ़ते संबंधों को लेकर हस्केल ने कहा कि ईरान का उद्देश्य इन संबंधों को कमजोर करना है। उनके अनुसार, तेहरान लंबे समय से इजरायल और मध्य पूर्व के अन्य देशों के बीच सहयोग को बाधित करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि उन्होंने दावा किया कि ईरान की यह रणनीति सफल नहीं हो रही है और क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग के कारण कई देश इजरायल के और करीब आ रहे हैं।

हस्केल ने विदेशों में रह रहे इजरायली नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी कहा कि इजरायली सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

सह-पायलट के सामान में फिलिस्तीन समर्थक सामग्री मिलने का दावा

इस बीच, इजरायल के i24 News ने एक अमीराती सूत्र के हवाले से दावा किया है कि ओमानी सह-पायलट के सामान से ‘फ्री फिलिस्तीन’ समूहों से संबंधित पर्चे और अन्य फिलिस्तीन समर्थक सामग्री मिली है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि सह-पायलट ने कथित तौर पर कई बार फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल के प्रति विरोध व्यक्त किया था।

रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियां सह-पायलट के कथित कट्टरपंथीकरण और संभावित आतंकवादी मकसद के पहलू की भी जांच कर रही हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

वहीं, जेरूसलम पोस्ट ने जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया कि ओमानी सह-पायलट के पास कोई दूसरी नागरिकता नहीं थी। इस मामले में यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं रखने वाले देश के नागरिक को इस मार्ग पर उड़ान भरने की अनुमति किस तरह मिली।

उड़ान के सह-पायलट की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, सीबीएस न्यूज के अनुसार, एक ओमानी अधिकारी ने पुष्टि की है कि कथित हमलावर का जन्म ओमान में हुआ था और वह ओमानी नागरिक है। ओमान सरकार ने सार्वजनिक रूप से अब तक उसकी नागरिकता की औपचारिक पुष्टि नहीं की है।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना की जांच जारी है और जांच एजेंसियां हमले के पीछे संभावित मकसद, सह-पायलट के संपर्कों और किसी बाहरी संगठन से उसके संबंधों की पड़ताल कर रही हैं।