देशभक्ति पर जावेद अख्तर की दो टूक, ‘वंदे मातरम्’ कहने में कोई आपत्ति नहीं

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डेस्क : राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर चल रही बहस के बीच गीतकार जावेद अख्तर ने अपनी राय स्पष्ट करते हुए कहा है कि ‘वंदे मातरम्’ कहने से उनके धर्म को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि वह देशभक्ति के मामले में किसी से पीछे नहीं हैं, लेकिन किसी भी धर्म या धार्मिक आस्था को उन पर थोपा नहीं जाना चाहिए।

एक बातचीत के दौरान जावेद अख्तर ने कहा कि वह एक भारतीय हैं और देश के प्रति उनके मन में पूरा सम्मान है। वह सौ बार ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश के प्रति सम्मान और प्रेम में उन्हें कोई संकोच नहीं है।

जावेद अख्तर ने यह भी कहा कि वह नास्तिक हैं और उन्हें नास्तिक रहने का अधिकार है। उनके मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति किसी धर्म में विश्वास नहीं रखता तो उसे किसी धार्मिक विचार या आस्था को मानने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती हिस्से को लेकर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, गीत के उन हिस्सों को लेकर उनका विरोध है, जिनमें धार्मिक भावनाओं का स्वरूप दिखाई देता है। उनका कहना है कि देशभक्ति और धार्मिक आस्था को अलग-अलग रखना जरूरी है।

वंदे मातरम् के सभी अंतरों को लेकर चल रही बहस के बीच जावेद अख्तर की यह टिप्पणी सामने आई है। उन्होंने संकेत दिया कि इस मुद्दे पर जरूरत पड़ने पर कानूनी रास्ता अपनाने पर भी विचार किया जा सकता है।