अहंकार नाग है और क्रोध आग, दोनों एक-दूसरे के जुड़वा भाई : मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’

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जयपुर : अणुविभा केंद्र में मंगलवार को ‘अहंकार बनाम विनम्रता’ विषय पर आध्यात्मिक सेमिनार का आयोजन हुआ। सेमिनार में मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने अहंकार और क्रोध के संबंध को समझाते हुए कहा कि “अहंकार नाग है और क्रोध आग है।” उन्होंने कहा कि जब क्रोध उत्पन्न होता है, तब अहंकार भी जागृत होकर फुफकारने लगता है। अहंकार और क्रोध दोनों मानो जुड़वा भाई हैं, जो एक-दूसरे की उत्पत्ति का कारण बनते हैं।

मुनिश्री ने कहा कि अहंकार मनुष्य के जीवन में अनेक प्रकार की अशांति और विघटन का कारण बनता है। यह रिश्तों में दरार पैदा करता है और व्यक्ति को दूसरों से दूर कर देता है। जहां अहंकार होता है, वहां विनम्रता के लिए स्थान नहीं बचता और विनम्रता के अभाव में व्यक्ति के विकास की गति भी रुक जाती है। उन्होंने कहा कि अहंकार शांति, मैत्री, एकता और आपसी समझौते की राह में बड़ी बाधा है।

इस अवसर पर मुनिश्री संभव कुमार जी ने कहा कि धर्म का मूल विनय है। अहंकार विनय का घातक होने के साथ-साथ व्यक्ति के विकास में भी बाधक है। उन्होंने कहा कि अहंकार मनुष्य के भीतर ऐसी दीवार खड़ी कर देता है, जिसके कारण वह अपनी कमियों को स्वीकार नहीं कर पाता। मुनिश्री ने कहा कि “अहंकार अभिशाप है और विनम्रता वरदान है।”

कार्यक्रम का आयोजन तेरापंथ महिला मंडल (शहर) की ओर से किया गया। मंडल की अध्यक्षा श्रीमती कौशल्या जी ने मंडल द्वारा किए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि समाज में आध्यात्मिक और जीवन-मूल्यों से जुड़े ऐसे कार्यक्रमों की विशेष आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अहंकार, क्रोध और विनम्रता जैसे विषय प्रत्येक व्यक्ति के जीवन से जुड़े हुए हैं और इन पर चिंतन समाज के लिए उपयोगी एवं प्रासंगिक है।

कार्यक्रम की शुरुआत तीर्थंकर सुपार्श्व प्रभु की स्तुति से हुई। इसके बाद प्रेक्षाध्यान, प्रत्याख्यान सहित विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। उपस्थित श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के प्रवचन के माध्यम से अहंकार से मुक्त होकर विनम्रता, संयम और आत्मचिंतन के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश प्राप्त किया।