भारत-चीन के बीच मतभेद बने रहेंगे, मुद्दों को सुलझाना जरूरी: एस. जयशंकर

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नई दिल्ली : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन जैसे बड़े पड़ोसी देशों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है। दोनों देशों को इन मुद्दों को स्वीकार करते हुए उनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के राष्ट्रीय हित में एक स्थिर और व्यावहारिक संबंध बनाए रखना जरूरी है।

समाचार चैनल एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, जयशंकर ने नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 में भारत-चीन संबंधों पर चर्चा के दौरान यह बात कही।

सीमा विवाद का समाधान जरूरी

जयशंकर ने भारत-चीन सीमा विवाद के समाधान पर कहा कि किसी भी अंतिम समझौते में पूरी सीमा का समाधान शामिल होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ठोस बातचीत की शुरुआत किसी एक क्षेत्र से की जा सकती है। इसके लिए दोनों देशों को संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।

गलवान संघर्ष से प्रभावित हुए संबंध

विदेश मंत्री ने वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुए संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना के बाद दोनों देशों के संबंध प्रभावित हुए। सीमा पर तनाव का असर व्यापार, राजनीतिक संबंधों और लोगों के बीच संपर्क पर भी पड़ा।

उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है। दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन को लेकर पहले भी कई समझौते और प्रक्रियाएं तय की गई थीं, जिनका उद्देश्य टकराव की आशंका को कम करना था।

दोनों देशों के हित में बेहतर संबंध

जयशंकर के अनुसार, भारत और चीन दोनों इस बात को समझते हैं कि उनके राष्ट्रीय हित में एक बुनियादी और व्यावहारिक संबंध बनाए रखना जरूरी है। गलवान संघर्ष के बाद पैदा हुआ तनाव उस समय की परिस्थितियों में समझा जा सकता था, लेकिन लंबे समय तक शत्रुतापूर्ण संबंध दोनों देशों के हित में नहीं हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंध सामान्य होने का अर्थ यह नहीं है कि दोनों देशों के सभी विवाद समाप्त हो जाएंगे। मतभेदों को पहचानना और उनका समाधान तलाशना आगे भी जरूरी रहेगा।