डेस्क : यूरोप के कई शहरों में शनिवार को हजारों युवाओं और आम नागरिकों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। इटली के मिलान, रोम और ट्यूरिन सहित स्पेन की राजधानी मैड्रिड, पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन और अल्बानिया की राजधानी तिराना में भी विरोध प्रदर्शन हुए। पिछले सप्ताह हुई हिंसा और लूटपाट की घटनाओं को देखते हुए इटली में पुलिस और सेना की भारी तैनाती की गई। मिलान में प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा, जबकि रोम और ट्यूरिन में पुलिस के साथ कुछ देर के लिए झड़पें हुईं। वहीं, तिराना में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक टकराव देखने को मिला।
मिलान में 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। मिलान में 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात किए गए, जबकि नाबालिगों से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई के संकेत भी दिए गए। पिछले सप्ताह हुई हिंसा में बड़ी संख्या में कम उम्र के प्रदर्शनकारियों के शामिल होने की बात सामने आई थी।
मिलान में पहले से तैनात सैकड़ों सैनिकों के अतिरिक्त नए सैनिकों की तैनाती की गई। शहर में लगभग 5,000 पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षा कर्मियों को भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया। निगरानी के लिए ड्रोन, रेलवे स्टेशनों पर जांच और त्वरित कार्रवाई करने वाली टीमों की मदद ली गई। संभावित हिंसा से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियों पर भी नजर रखी गई।
पिछले सप्ताह प्रदर्शनकारियों ने शहर के प्रमुख कारोबारी इलाकों में दुकानों को निशाना बनाया था। कई दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट हुई थी। इसके बाद ओमेगा, टिफनी और गुच्ची जैसे लग्जरी ब्रांडों के शोरूम की खिड़कियों को सुरक्षा के लिहाज से ढक दिया गया। एप्पल स्टोर भी बंद रहा। हालांकि, शनिवार को स्थिति सामान्य होने के साथ कई दुकानों ने दोबारा कारोबार शुरू कर दिया।
सरकार के खिलाफ नारे, बिजली बिल जलाकर जताया विरोध
मिलान में शाम होते-होते प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ जुट गई। लोगों ने प्रधानमंत्री मेलोनी के खिलाफ नारे लगाए और सरकार पर सवाल उठाते हुए ‘राज्य के झूठ के खिलाफ’ जैसे संदेश लिखे बैनर प्रदर्शित किए।
प्रदर्शन के दौरान एक समूह ने इटली के ऊर्जा नियामक कार्यालय के बाहर गोबर फेंका और बिजली के भारी-भरकम बिल का प्रतीकात्मक नमूना जलाया। प्रदर्शनकारियों की नाराजगी के पीछे शिक्षा, भ्रष्टाचार, महंगाई, आवास और सरकार की नीतियों सहित कई मुद्दे बताए जा रहे हैं।
मिलान में मेयर पद के संभावित उम्मीदवार पियरफ्रांसेस्को मेजोरिनो भी प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने दिनभर के प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बताया। वह 2027 की शुरुआत में होने वाले मध्य-वामपंथी दलों के आंतरिक चुनाव में हिस्सा लेने वाले हैं।
पुलिस के अनुसार, पिछले सप्ताह हुई हिंसा और लूटपाट में लगभग 2,000 युवा प्रदर्शनकारी शामिल थे। दो दिनों के दौरान 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 34 नाबालिग थे। अधिकारियों ने एक 30 वर्षीय स्वतंत्र पत्रकार के खिलाफ भी जांच शुरू की है, जिसे नवगठित ‘अक्टूबर 17 आंदोलन’ का कथित प्रमुख रणनीतिकार बताया जा रहा है।
रोम में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इटली की राजधानी रोम में भी सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई। लग्जरी बाजारों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों के आसपास अतिरिक्त निगरानी रखी गई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कोलोसियम में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बाहर कर दिया।
दूसरी ओर, कई सौ विद्यार्थियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर यह संदेश देने की कोशिश की कि हिंसा करने वाले लोग पूरे युवा वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
इसी दौरान रोम में युद्ध-विरोधी प्रदर्शन भी आयोजित किया गया। आयोजकों ने प्रतिभागियों से चेहरा खुला रखने और हाथ दिखाई देने की अपील की थी, ताकि प्रदर्शन को हिंसक गतिविधियों से अलग रखा जा सके। हालांकि, पियाजा डेला रेपुब्बलिका के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कुछ देर तक झड़प हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने पानी की बौछार करने वाली गाड़ी का इस्तेमाल किया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी पीछे हट गए।
अल्बानिया में हिंसक हुआ प्रदर्शन
अल्बानिया की राजधानी तिराना में प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों में आग लगा दी और पुलिस पर वस्तुएं फेंकीं। अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार को शहर की सड़कों पर लगभग 2,500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
पिछले एक सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शन में हाई स्कूल और विश्वविद्यालय के विद्यार्थी शिक्षा शुल्क कम करने, शिक्षा क्षेत्र में सरकारी निवेश बढ़ाने और व्यवस्था में भ्रष्टाचार समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एदी रामा के नेतृत्व वाली सरकार के इस्तीफे की मांग कर रहे व्यापक आंदोलन से भी जुड़े हैं।
विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर आयोजित एक अलग प्रदर्शन में भी हिंसा हुई। प्रधानमंत्री रामा ने शनिवार को कहा कि सरकार विद्यार्थियों की मांगों पर जवाब तैयार कर रही है और उन्होंने बातचीत के लिए आगे आने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
स्पेन में पेंशन और पुर्तगाल में आवास के मुद्दे पर प्रदर्शन
स्पेन की राजधानी मैड्रिड में हजारों बुजुर्गों और अन्य नागरिकों ने सार्वजनिक पेंशन व्यवस्था में बदलाव के विरोध में शांतिपूर्ण मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों को आशंका है कि पेंशन व्यवस्था के निजीकरण से आम नागरिकों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
यह प्रदर्शन अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले हुआ है। प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज के नेतृत्व वाली सोशलिस्ट पार्टी ने पेंशन के निजीकरण से जुड़े मुद्दे पर रूढ़िवादी विपक्षी दल पॉपुलर पार्टी की आलोचना की है।
स्पेन में बढ़ती आवास लागत भी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। किराये और मकानों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण बड़ी संख्या में नागरिकों के लिए घर खरीदना या किराये पर लेना मुश्किल हो रहा है।
इसी तरह पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में भी लोगों ने किफायती आवास की मांग को लेकर मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो की सरकार के उन प्रस्तावित कदमों का विरोध किया, जिनमें सालाना किराया वृद्धि पर लगी सीमा में ढील देने और किराया नहीं चुकाने वाले किरायेदारों को बेदखल करने की प्रक्रिया आसान बनाने जैसे उपाय शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच भरोसा बढ़ाना तथा किराये के बाजार को मजबूत करना है। वहीं, प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इन बदलावों से किरायेदारों की स्थिति कमजोर होगी और उन्हें आवास संबंधी अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
यूरोप के विभिन्न शहरों में हुए ये प्रदर्शन दर्शाते हैं कि शिक्षा, भ्रष्टाचार, पेंशन, आवास और सरकारी नीतियों से जुड़े मुद्दे नागरिकों के बीच लगातार असंतोष पैदा कर रहे हैं। हालांकि, अधिकांश स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ शहरों में हिंसा और पुलिस के साथ टकराव ने प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बढ़ा दी है।









