डेस्क : भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण में हुई लंबी देरी को लेकर भारत सरकार ब्रिटेन से नाराज थी। ब्रिटेन की पूर्व गृह सचिव प्रीति पटेल ने कहा है कि नीरव मोदी के प्रत्यर्पण में देरी से भारत में काफी निराशा और नाराजगी थी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर हैरानी और चिंता है कि नीरव मोदी इतने लंबे समय तक ब्रिटेन में रह सका।
प्रीति पटेल के मुताबिक, नीरव मोदी के प्रत्यर्पण का मामला भारत और ब्रिटेन के बीच संबंधों में एक संवेदनशील मुद्दा बन गया था। भारत लंबे समय से नीरव मोदी को वापस लाने की मांग करता रहा है। भारतीय जांच एजेंसियों के अनुसार, नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के कथित घोटाले में मुख्य आरोपियों में शामिल है।
घोटाला सामने आने के बाद नीरव मोदी भारत से फरार होकर ब्रिटेन पहुंच गया था। मार्च 2019 में उसे लंदन में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध पर ब्रिटेन की अदालतों में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। ब्रिटेन की अदालत ने 2021 में नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित किए जाने के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद तत्कालीन गृह सचिव प्रीति पटेल ने भी उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी।
हालांकि, नीरव मोदी ने प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखी और विभिन्न अदालतों में अपील के जरिए प्रक्रिया को चुनौती दी। इसी वजह से उसके भारत प्रत्यर्पण में लगातार देरी होती रही। प्रीति पटेल ने कहा कि भारत सरकार इस बात से नाराज थी कि ब्रिटेन की कानूनी प्रक्रिया के कारण नीरव मोदी को भारत लाने में इतना लंबा समय लग रहा है।
नीरव मोदी पर भारत में बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े गंभीर आरोप हैं। भारतीय एजेंसियों का आरोप है कि उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पीएनबी से धोखाधड़ी के जरिए बड़ी रकम हासिल की। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहे हैं।
प्रीति पटेल का बयान ऐसे समय में सामने आया है जब नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को लेकर ब्रिटेन में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण चरण तक पहुंच चुकी है। उनके बयान से यह भी संकेत मिलता है कि भारत सरकार इस मामले को लेकर ब्रिटेन के साथ लगातार संपर्क में थी और प्रत्यर्पण में हो रही देरी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करती रही थी।
नीरव मोदी का मामला उन भारतीय आर्थिक अपराधियों के मामलों में प्रमुख है, जिनके प्रत्यर्पण की मांग भारत लंबे समय से दूसरे देशों से करता रहा है। भारत सरकार का लगातार कहना रहा है कि आर्थिक अपराध कर विदेश भागने वाले आरोपियों को कानून का सामना करने के लिए भारत वापस लाया जाना चाहिए।





