बिहार में आरक्षण पर सियासी संग्राम, चिराग बोले- अन्याय नहीं होने दूंगा

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डेस्क : बिहार में अनुसूचित जाति-जनजाति आरक्षण के प्रावधानों की समीक्षा को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा है कि किसी दूसरे वर्ग की मांग पूरी करने के लिए मौजूदा आरक्षण अधिकारों में कटौती स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि वह किसी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।

चिराग पासवान ने कहा कि जिन वर्गों को आरक्षण के तहत अधिकार और हक मिले हुए हैं, उन्हें सुरक्षित रखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग एक ही वर्ग के लोगों के बीच मतभेद पैदा कर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं।

‘जाति नहीं, जमात की बात करता हूं’

चिराग ने कहा कि उन्होंने हमेशा जाति की नहीं, बल्कि ‘जमात’ की बात की है। उनका कहना है कि सभी समाजों को साथ लेकर चलना जरूरी है। उन्होंने सामान्य वर्ग और सवर्ण समाज की समस्याओं और शिकायतों पर भी सरकार से संवाद करने तथा उनके समाधान की दिशा में प्रयास करने की बात कही।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी का अधिकार छीनकर दूसरे को देना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

आरक्षण की समीक्षा में दिक्कत क्या : मंगनी लाल मंडल

आरक्षण को लेकर जारी विवाद के बीच राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा कि आरक्षण संवैधानिक अधिकार है और समय-समय पर इसकी समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आरक्षण की समीक्षा की बात हो रही है तो इसमें आपत्ति क्यों होनी चाहिए।

मंडल ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था को समाप्त नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार सामाजिक और पिछड़े वर्गों को मिले संवैधानिक अधिकारों को बनाए रखते हुए समय-समय पर व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक है।

पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने पर जोर

बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने विवाद के बीच कहा कि चिराग पासवान और जीतन राम मांझी, दोनों की अपनी-अपनी बात उचित है। उन्होंने कहा कि आरक्षण में कटौती के बजाय उन वर्गों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए जो अभी भी पिछड़े हुए हैं।

जायसवाल ने कहा कि जिन जातियों को जितना आरक्षण मिला हुआ है, उसमें कटौती नहीं होनी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि आरक्षण का लाभ वास्तव में सबसे पिछड़े लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं।

आरक्षण को लेकर नेताओं के अलग-अलग बयानों से बिहार की राजनीति में बहस और तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक तौर पर और गरमाने के आसार हैं।