नई दिल्ली : देश के न्यायिक ढांचे में उच्च न्यायालयों के स्थायी मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। जुलाई 2026 तक देश के 25 हाईकोर्ट में से सात हाईकोर्ट ऐसे हैं, जहां कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के जरिए कामकाज चल रहा है।
इनमें बॉम्बे, कलकत्ता, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख, मध्य प्रदेश, पटना, पंजाब एवं हरियाणा और राजस्थान हाईकोर्ट शामिल हैं। इन अदालतों में स्थायी मुख्य न्यायाधीशों के पद अलग-अलग कारणों से रिक्त हुए हैं। इनमें कुछ पद मुख्य न्यायाधीशों के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने और कुछ सेवानिवृत्ति के कारण खाली हुए हैं।
दरअसल, मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने की सिफारिश की थी। केंद्र की मंजूरी के बाद इन नियुक्तियों से कई हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के पद रिक्त हो गए।
संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत जब किसी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद खाली होता है, तब राष्ट्रपति कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति कर सकते हैं। फिलहाल सात हाईकोर्ट इसी व्यवस्था के तहत संचालित हो रहे हैं।
स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बनाने वाली बात यह है कि वर्ष 2026 के अंत तक पांच और मुख्य न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इनमें छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, उड़ीसा और उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं। इससे हाईकोर्ट में स्थायी नियुक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के सामने चुनौती और बढ़ सकती है।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट में भी फिलहाल स्वीकृत 37 पदों के मुकाबले 35 न्यायाधीश कार्यरत हैं। इस साल दो और न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने की संभावना है।








