वॉशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने की योजना फिलहाल टाल दी है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन के अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि व्यापक सैन्य अभियान से मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सेना के पास मौजूद पैट्रियट एंटी-मिसाइल इंटरसेप्टर का भंडार तेजी से घट सकता है। इससे अमेरिकी सैनिकों, खाड़ी देशों के सहयोगियों और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमलों का खतरा बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों और सैन्य कमांडरों के बीच हुई गोपनीय बैठकों में हथियारों और विशेष रूप से पैट्रियट इंटरसेप्टर की घटती संख्या को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी आशंका व्यक्त की कि लंबे सैन्य अभियान से क्षेत्रीय संकट के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक अस्थिरता भी बढ़ सकती है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने निजी तौर पर प्रशासन को बताया कि ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान को अंजाम देना संभव है, लेकिन इससे अमेरिकी सेंट्रल कमांड के लिए उपलब्ध मिसाइल रोधी प्रणालियों पर भारी दबाव पड़ेगा।
व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन च्युंग ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा से कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की बात कहते रहे हैं, लेकिन यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में आतंकी गतिविधियां जारी रखता है या अमेरिकी सहयोगियों को निशाना बनाता है, तो सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने ईरान को बातचीत के रास्ते पर लौटने की सलाह देते हुए कहा कि ऐसा नहीं होने पर उसे परिणाम भुगतने होंगे।
इस बीच, संभावित सैन्य टकराव की तैयारी के तहत पेंटागन ने हाल के दिनों में मध्य पूर्व में अतिरिक्त सैनिकों, हथियारों और सैन्य सामान की तैनाती तेज कर दी है। अमेरिकी बलों ने ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्र और होर्मुज जलडमरूमध्य तक आपूर्ति पहुंचाने वाले मार्गों में इस्तेमाल होने वाले कई रेलवे पुलों को भी नुकसान पहुंचाया या नष्ट किया है।
सैन्य योजनाकारों ने ईरान के तटीय रडार, जहाज रोधी मिसाइल ठिकानों और नौसैनिक गश्ती नौकाओं पर हमले के विकल्पों पर भी विचार किया था। इसके अलावा ऊर्जा प्रतिष्ठानों, परिवहन नेटवर्क और ईरान की भूमिगत परमाणु सुविधा पर संभावित हमले की योजना पर भी चर्चा हुई।
हालांकि, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के सामने हथियारों के घटते भंडार की चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट में द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से कहा गया है कि अप्रैल के अंत तक अमेरिकी रक्षा विभाग 1,200 से अधिक पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल कर चुका था। इनमें से प्रत्येक मिसाइल की कीमत 4 मिलियन डॉलर से अधिक बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, इसके बाद से हथियारों का भंडार और कम हुआ है।
शुक्रवार को ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से अमेरिकी सैन्य बलों को “पूरी तरह तैयार” बताया था और इससे पहले Axios को दिए एक इंटरव्यू में ईरान के खिलाफ “पहले से बड़ा हमला” करने की संभावना भी जताई थी। लेकिन शुक्रवार को वरिष्ठ कैबिनेट सदस्यों और सलाहकारों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद उन्होंने व्यापक सैन्य कार्रवाई को मंजूरी नहीं दी।
रिपोर्ट के अनुसार, जेरेड कुशनर समेत कुछ वरिष्ठ सलाहकारों ने सैन्य कार्रवाई के बजाय लंबे समय तक कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बनाए रखने की रणनीति का समर्थन किया। इसी क्रम में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने शुक्रवार को ईरानी कारोबारी बाबक जंजानी से जुड़े वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ नौ कंपनियों और चार लोगों पर नए प्रतिबंध लगाए।
इस बीच, करीब दो सप्ताह तक चले भीषण सैन्य तनाव के बाद ईरान ने शनिवार को रात में किसी नए हवाई हमले की सूचना नहीं दी। इससे अमेरिकी सैन्य हमलों की लगातार 13 रातों के बाद अस्थायी विराम के संकेत मिले हैं। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़े तनाव के बीच क्षेत्र में स्थिति अब भी बेहद गंभीर बनी हुई है।








