डेस्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी हथियार और मिसाइल इंटरसेप्टर भंडार में कमी की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका के पास दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में कहीं अधिक गोला-बारूद और हथियार हैं। ट्रंप ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल से बातचीत में कहा, “हमारे पास दुनिया में किसी भी देश से कहीं अधिक गोला-बारूद है और जितनी जरूरत है, उससे भी कहीं ज्यादा है।”
ट्रंप का यह बयान द न्यूयॉर्क टाइम्स की उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया था कि अमेरिकी सैन्य नेतृत्व ने ईरान के खिलाफ अभियान बढ़ने की स्थिति में पैट्रियट और अन्य वायु रक्षा इंटरसेप्टर मिसाइलों के भंडार को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने निजी चर्चा में चेतावनी दी थी कि बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाने से इंटरसेप्टर का भंडार तेजी से कम हो सकता है।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर का मानना है कि सीमित भंडार के बावजूद अमेरिकी सेना पैट्रियट समेत अन्य एयर डिफेंस इंटरसेप्टर का प्रबंधन कर सकती है। अमेरिकी रणनीति का एक हिस्सा ईरान की मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता को पहले ही कमजोर करना है, ताकि वह बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले करने की स्थिति में न पहुंच सके।
इस बीच, व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने कहा है कि पैट्रियट और THAAD मिसाइलों के इस्तेमाल से जुड़े ताजा आंकड़े सार्वजनिक करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। हालांकि, सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के विश्लेषकों मार्क कैनसियन और क्रिस पार्क के अनुमान के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के बाद से कम से कम 1,500 पैट्रियट इंटरसेप्टर इस्तेमाल किए जा चुके हैं और अमेरिका के पास 1,000 से भी कम इंटरसेप्टर बचे हो सकते हैं।
विश्लेषकों ने पहले भी चेतावनी दी थी कि घटते हथियार भंडार निकट भविष्य में जोखिम पैदा कर सकते हैं और चीन जैसे सक्षम प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ संभावित युद्ध में हथियारों की खपत मौजूदा संघर्ष की तुलना में कहीं अधिक हो सकती है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट और पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने हालांकि कहा कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति द्वारा दिए जाने वाले किसी भी मिशन को पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधन मौजूद हैं।
ईरानी मिसाइलों का खतरा पिछले सप्ताह उस समय भी सामने आया, जब ईरान की ओर से दागी गई तीन बैलिस्टिक मिसाइलें जॉर्डन स्थित एक सैन्य अड्डे तक पहुंच गईं। इनमें से एक मिसाइल के आवासीय क्षेत्र में गिरने से तीन अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत हो गई। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान लगातार अपनी रणनीति में बदलाव कर रहा है और मिसाइलों के उड़ान मार्ग, गति तथा दिशा में बदलाव कर अमेरिकी वायु रक्षा प्रणालियों को चकमा देने की कोशिश कर रहा है। इससे इंटरसेप्टर मिसाइलों की खपत और बढ़ रही है।
पेंटागन में इस बात को लेकर भी चिंता बढ़ रही है कि खाड़ी क्षेत्र के अमेरिकी सहयोगी देशों के पास भी एयर डिफेंस इंटरसेप्टर का भंडार दबाव में है। ऐसे में ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू करने को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर मतभेद और चिंताएं बढ़ गई हैं।
हालांकि, लगभग दो सप्ताह तक चले लगातार सैन्य हमलों के बाद ईरान ने शनिवार रात किसी नए बमबारी अभियान की सूचना नहीं दी। इससे क्षेत्र में लगातार 13 रातों तक चले अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद कुछ समय के लिए तनाव में विराम के संकेत मिले हैं।








