डेस्क : अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्वीकार किया है कि जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों को लेकर ट्रंप प्रशासन से सार्वजनिक संवाद (कम्युनिकेशन) के स्तर पर गलती हुई थी। उन्होंने कहा कि मामले को जिस तरह लोगों के सामने रखा गया, उससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई, हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया कि तथ्यों को छिपाने की कोई जानबूझकर कोशिश की गई थी।
एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान वेंस ने कहा कि प्रशासन को उपलब्ध दस्तावेजों के बारे में अधिक स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से जानकारी देनी चाहिए थी। उनका मानना था कि संचार की रणनीति सही नहीं होने के कारण लोगों के बीच कई तरह की अटकलें और गलतफहमियां पैदा हुईं।
उन्होंने पूर्व अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी के उन बयानों का भी उल्लेख किया, जिनमें एपस्टीन की कथित “क्लाइंट लिस्ट” को लेकर चर्चा हुई थी। वेंस ने कहा कि उन टिप्पणियों से जनता की अपेक्षाएं बढ़ गईं, जबकि वास्तविक स्थिति अलग थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी साजिश या जानकारी छिपाने का मामला नहीं, बल्कि संचार संबंधी चूक थी।
वेंस ने यह भी कहा कि सरकार को उपलब्ध दस्तावेजों को जल्द सार्वजनिक करना चाहिए था, लेकिन ऐसा करते समय पीड़ितों की गोपनीयता और संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी था।
गौरतलब है कि जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों और उनके सार्वजनिक किए जाने को लेकर अमेरिका में लंबे समय से राजनीतिक बहस चल रही है। इस मामले में अधिक पारदर्शिता की मांग लगातार उठती रही है और इसे लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।








