डेस्क : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हाफिज सईद को लेकर पूछे गए सवालों से बचते नजर आए। 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान गुरुवार को जब शरीफ संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुंचे तो पत्रकारों ने उनसे पूछा, “प्रधानमंत्री, आप आतंकियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?” शरीफ ने सवाल का कोई जवाब नहीं दिया।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से लौटते समय भी पत्रकारों ने उनका पीछा किया और पूछा कि लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद पर मुकदमा कब चलाया जाएगा? इस सवाल पर भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
हाफिज मुहम्मद सईद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा का रहने वाला है और प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है। भारत ने उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत नामित आतंकवादी घोषित कर रखा है। सईद 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में भी वांछित आरोपी है।
22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले की जांच में भी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तान स्थित आतंकियों की भूमिका का आरोप लगाया है। एनआईए की पूरक आरोपपत्र में हाफिज मुहम्मद सईद को आरोपी नंबर 8 बनाया गया है और हमले की व्यापक साजिश में उसकी कथित भूमिका का उल्लेख किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को घेरा
इससे एक दिन पहले भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान पर तीखा पलटवार किया था। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और दूसरे देशों के क्षेत्र पर नजर रखने का आरोप लगाया।
त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान को अपनी ऊर्जा क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं और सीमा पार आतंकवाद के बजाय विकास और अपनी कर्जग्रस्त अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने में लगानी चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नागरिकों की मौत, गिरफ्तारियों और भोजन, ईंधन तथा दवाओं की आपूर्ति प्रभावित होने का भी मुद्दा उठाया।
भारत ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से संयुक्त राष्ट्र में उठाए जा रहे मुद्दों के बीच उसके अपने यहां नागरिकों के अधिकारों और मानवीय स्थिति से जुड़े गंभीर सवाल मौजूद हैं।








