‘हमारा नया और खूबसूरत ग्रीनलैंड’, ट्रंप के बयान से फिर गरमाया विवाद

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डेस्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि ग्रीनलैंड में बड़े पैमाने पर तेल, गैस और खनिजों की खोज शुरू होने वाली है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब डेनमार्क के अधीन स्वायत्त शासन वाले इस आर्कटिक द्वीप पर अमेरिका के नियंत्रण की उनकी महत्वाकांक्षा को लेकर पहले ही विवाद बना हुआ है। ग्रीनलैंड में वर्ष 2021 से तेल की नई खोज पर प्रतिबंध लागू है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ग्रीनलैंड को ‘हमारा नया और खूबसूरत ग्रीनलैंड’ बताया। उन्होंने सितंबर में हुए सुरक्षा समझौते का उल्लेख करते हुए इसे अमेरिका की रणनीतिक सफलता के रूप में पेश किया। हालांकि, उन्होंने तेल, गैस या खनिजों की खोज से संबंधित किसी विशिष्ट समझौते, परियोजना अथवा अनुमति का विवरण नहीं दिया।

सुरक्षा समझौते में खनन का अधिकार शामिल नहीं

ग्रीनलैंड लंबे समय से अमेरिका और डेनमार्क के बीच रणनीतिक चर्चा का केंद्र रहा है। ट्रंप वर्ष 2019 से ही सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस खनिज-संपन्न द्वीप को अमेरिका के नियंत्रण में लेने या खरीदने की इच्छा जताते रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कई बार सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना से भी इनकार नहीं किया।

पिछले महीने अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच हुए समझौते से क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का रास्ता खुला। इस समझौते को दोनों पक्षों के बीच जारी तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था। हालांकि, समझौते में तेल या खनिजों की खोज तथा खनन के अधिकार आवंटित नहीं किए गए हैं।

ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि ग्रीनलैंड में आसानी से उपलब्ध तेल का भंडार दुनिया के लगभग किसी भी अन्य क्षेत्र से अधिक हो सकता है। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई विशिष्ट अध्ययन या आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया।

तेल की खोज पर प्रतिबंध, कंपनी की योजना पर नजर

ग्रीनलैंड ने वर्ष 2021 में यूरेनियम खनन पर प्रतिबंध लगाने के साथ तेल की नई खोज पर भी रोक लगा दी थी। हालांकि, वहां की सरकार यह समीक्षा कर रही है कि टेक्सास की कंपनी ग्रीनलैंड एनर्जी को प्रतिबंध से पहले जारी किए गए परमिट के आधार पर काम करने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं।

कंपनी ने अगस्त में कहा था कि उसकी योजना वर्ष 2027 में ग्रीनलैंड के पूर्वी तट पर स्थित एक ऐसे बेसिन में तेल की खोज के लिए ड्रिलिंग करने की है, जहां अब तक परीक्षण नहीं हुआ है। हालांकि, कंपनी के पास स्वयं इस काम के लिए परमिट नहीं था। इस क्षेत्र में पूर्व मालिक एआरसीओ ने 1970 के दशक में भूकंपीय सर्वेक्षण पर भारी खर्च किया था, लेकिन वहां कभी ड्रिलिंग नहीं की गई।

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्रंप के बयान पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। डेनमार्क के विदेश मंत्रालय और ग्रीनलैंड के खनिज संसाधन मंत्रालय की ओर से भी तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

ट्रंप की मंशा पर उठे सवाल

डेनमार्क के स्वतंत्र सुरक्षा नीति सलाहकार जैकब कार्सबो ने कहा कि ट्रंप के बयान को इस संकेत के रूप में देखा जा सकता है कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने की उनकी इच्छा अब भी बरकरार है। उनके अनुसार, अमेरिका और डेनमार्क के बीच हुए समझौते को ट्रंप की मंशा में बदलाव के रूप में देखना बेहद खतरनाक होगा।

दस पन्नों के इस समझौते में दो नए सैन्य ठिकानों और ट्रंप की प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए रास्ता तैयार करने की बात शामिल है। साथ ही, इसमें डेनमार्क की संप्रभुता और ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार की भी पुष्टि की गई है।

ट्रंप ने अपने पोस्ट में ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति को अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य में अमेरिका पर होने वाले किसी भी हमले का रास्ता ग्रीनलैंड के ऊपर से आ सकता है और वहां अमेरिकी रक्षा व्यवस्था ड्रोन, मिसाइलों तथा अन्य हथियारों को रोकने में सक्षम होगी।

ट्रंप के ताजा बयान ने एक बार फिर ग्रीनलैंड के प्राकृतिक संसाधनों और रणनीतिक महत्व को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस तेज कर दी है। हालांकि, तेल और खनिजों की खोज को लेकर किसी नए समझौते या आधिकारिक अनुमति की पुष्टि अभी नहीं हुई है।