नई दिल्ली : जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के मामलों की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षाबलों की कथित कार्रवाई की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि समिति को महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े यौन उत्पीड़न के आरोपों की प्राथमिकता से जांच करने और इस संबंध में अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न का मुद्दा अदालत के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए हैं और इस संबंध में शिकायतें भी सामने आई हैं।
अदालत ने इससे पहले जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस तथा सुरक्षाबलों की कार्रवाई की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति के गठन का आदेश दिया था। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। समिति प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं, पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों से जुड़े आरोपों की जांच करेगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न के मामलों को जांच में प्राथमिकता दी जाएगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।








