‘जमीन हो, आसमान या पाताल… हम उन्हें छोड़ेंगे नहीं’: ऑपरेशन सिंदूर पर अजित डोभाल

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नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश बिल्कुल स्पष्ट था—वे “धरती पर हों या नर्क में, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा।” राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित नई डॉक्यूमेंट्री सीरीज में प्रधानमंत्री के इस संदेश का खुलासा किया है।

‘Declassified Operation Sindoor | The Untold Story’ नाम की यह डॉक्यूमेंट्री सीरीज 15 अगस्त से डिस्कवरी चैनल इंडिया पर प्रसारित होगी। खास बात यह है कि इसमें पहली बार अजित डोभाल समेत ऑपरेशन से जुड़े कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों के विस्तृत बयान सामने आए हैं।

डॉक्यूमेंट्री के ट्रेलर में अजित डोभाल के अलावा पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) रहे लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई और पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के बयान शामिल हैं।

अजित डोभाल ने प्रधानमंत्री मोदी के संदेश को याद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा था—“जमीन में हों, आसमान में हों, पाताल में हों, जहां भी होंगे, हम उनके पीछे जाएंगे।” ऑपरेशन सिंदूर को लेकर यह अजित डोभाल की पहली टेलीविजन प्रस्तुति मानी जा रही है।

पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि पाकिस्तान को साफ तौर पर बता दिया गया था कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।

पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने नागरिकों को निशाना बनाया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। आतंकवादियों द्वारा पीड़ितों से उनकी धार्मिक पहचान पूछकर हमला किए जाने की बात सामने आई थी। इस घटना ने देशभर में भारी आक्रोश पैदा किया।

इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान तथा पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाया। कार्रवाई का उद्देश्य हमले के जिम्मेदार आतंकवादियों, उनके ठिकानों और आतंकवादी प्रशिक्षण ढांचे को नष्ट करना था।

इसके बाद पाकिस्तान की ओर से सैन्य कार्रवाई तेज होने पर भारत ने जवाबी कार्रवाई में उसके सैन्य ठिकानों और एयरबेस को निशाना बनाया। बढ़ते सैन्य दबाव के बीच पाकिस्तान ने संघर्षविराम की मांग की।

ऑपरेशन महादेव में मारे गए पहलगाम हमले के आतंकी

पहलगाम हमले में शामिल तीनों आतंकवादियों को बाद में ऑपरेशन महादेव के दौरान मार गिराया गया। यह कार्रवाई भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त रूप से की।

ऑपरेशन सिंदूर को भारत की सैन्य और रणनीतिक क्षमता के एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन के रूप में देखा गया। इसमें सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक, आर्थिक, सूचना और रणनीतिक स्तर पर भी कई कदम उठाए गए।

सिंधु जल समझौते पर बड़ा फैसला

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण फैसला 1960 के सिंधु जल समझौते को स्थगित करना था। सरकार ने कहा था कि पाकिस्तान जब तक सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को विश्वसनीय और स्थायी रूप से समाप्त नहीं करता, तब तक यह समझौता प्रभावी नहीं रहेगा।

सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उसकी बड़ी आबादी और कृषि व्यवस्था इस जल प्रणाली पर निर्भर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ऑपरेशन सिंदूर के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था कि यह केवल एक सैन्य अभियान का नाम नहीं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों की भावनाओं और न्याय के संकल्प का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने कहा था, “भारत और उसके लोगों की सुरक्षा के लिए हम मजबूत कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। युद्ध के मैदान में हमने हमेशा पाकिस्तान को हराया है और इस बार ऑपरेशन सिंदूर ने इसमें एक नया आयाम जोड़ा है।”

ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की कि आतंकवाद का जवाब निर्णायक कार्रवाई से दिया जाएगा और इसके लिए सीमा या कूटनीतिक जटिलताएं बाधा नहीं बनेंगी।