राष्ट्रपति मुर्मू का राष्ट्र के नाम संदेश: हर नागरिक को अवसर मिलना ही स्वतंत्रता का असली अर्थ

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नई दिल्ली :  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक है, जब हर नागरिक को अपनी आकांक्षाएं पूरी करने के लिए समान अवसर मिलें और वह भारत को विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनाने में योगदान दे सके।

राष्ट्रपति ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि कुछ ही घंटों में देश स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश करेगा। उन्होंने कहा कि देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीय इस राष्ट्रीय पर्व को पूरे उत्साह और गर्व के साथ मनाते हैं। तिरंगा हमारी स्वतंत्रता का प्रतीक है और इसे फहराते समय प्रत्येक भारतीय के मन में गौरव की भावना होती है।

उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुआ और प्रत्येक नागरिक स्वतंत्र भारत के भविष्य का निर्माता बना। स्वतंत्रता का असली अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि हर नागरिक उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाकर अपनी आकांक्षाओं को पूरा कर सके और देश को दुनिया का अग्रणी राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में योगदान दे।

राष्ट्रपति ने राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले विभिन्न वर्गों की सराहना करते हुए कहा कि समर्पित विद्यार्थी और शिक्षक, विकास के लिए प्रतिबद्ध वैज्ञानिक एवं इंजीनियर, स्वास्थ्य सेवाओं में जुटे डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी, मेहनतकश श्रमिक तथा हमारे अन्नदाता किसान देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने खिलाड़ियों, शिल्पकारों और कलाकारों, बुद्धिजीवियों, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मियों, जनप्रतिनिधियों, न्याय व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों, कर्तव्यनिष्ठ सिविल सेवकों, निवेशकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सफाई मित्रों के योगदान को भी रेखांकित किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में निहित मौलिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करने वाला प्रत्येक नागरिक राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार है। उन्होंने ऐसे सभी नागरिकों के प्रति अपनी हार्दिक सराहना व्यक्त की।

उन्होंने तीनों सेनाओं, सशस्त्र पुलिस बलों और पुलिसकर्मियों के समर्पण की भी प्रशंसा की। राष्ट्रपति ने कहा कि देश की सुरक्षा और सेवा के लिए उनका अटूट समर्पण राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने विदेशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों और भारतीय दूतावासों में कार्यरत अधिकारियों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ये लोग विश्व मंच पर भारत की प्रतिष्ठा और सम्मान बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

राष्ट्रपति का संदेश स्पष्ट था कि स्वतंत्रता केवल अधिकारों का उत्सव नहीं, बल्कि अवसर, कर्तव्य और राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी का संकल्प भी है।