डेस्क : शहरों में बढ़ती मकानों की कीमतों और महंगे किराये के बीच केंद्र सरकार ने ऐसे लोगों के लिए किफायती आवास की व्यवस्था की है, जो घर खरीदने की स्थिति में नहीं हैं या फिलहाल किराये के मकान में रहना चाहते हैं। यह सुविधा प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग (एआरएच) व्यवस्था के जरिए उपलब्ध कराई जा रही है।
इस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में लोगों को साफ-सुथरे और किफायती किराये के मकान उपलब्ध कराना है। खासतौर पर दूसरे शहरों से रोजगार या काम की तलाश में आने वाले कम आय वाले परिवारों के लिए यह योजना उपयोगी मानी जा रही है।
किन लोगों को मिलेगा लाभ
अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा शहरी प्रवासी, बेघर और जरूरतमंद लोग भी इसके दायरे में आ सकते हैं।
योजना में औद्योगिक श्रमिक, कामकाजी महिलाएं, निर्माण श्रमिक, स्ट्रीट वेंडर, रिक्शा चालक और छोटे सेवा प्रदाताओं के लिए भी किराये के आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान है। संविदा कर्मचारियों को भी इस व्यवस्था का लाभ मिल सकता है।
आवास के साथ बुनियादी सुविधाएं
योजना के तहत केवल मकान उपलब्ध कराने पर ही जोर नहीं दिया गया है। आवासीय परिसरों में पानी, सीवर या सेप्टेज व्यवस्था, साफ-सफाई और आंतरिक सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था है।
इसके अलावा सामुदायिक केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र और क्रेच जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा सकती हैं। जरूरत के अनुसार परिसर के आसपास छोटी दुकानें और अन्य व्यावसायिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं, ताकि लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूर न जाना पड़े।
दो मॉडल से लागू होगी व्यवस्था
अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग को दो मॉडल के जरिए लागू किया जाएगा। पहले मॉडल में सरकार द्वारा पहले से बनाए गए लेकिन खाली पड़े मकानों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी अथवा सार्वजनिक एजेंसियों के माध्यम से किराये के आवास में बदला जाएगा।
दूसरे मॉडल में सरकारी या निजी संस्थाएं जरूरतमंद लोगों के लिए नए किराये के मकान बनाएंगी। इन आवासीय परिसरों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी संबंधित संस्थाओं की होगी।
महंगे शहरों में राहत की उम्मीद
शहरी क्षेत्रों में मकान खरीदने की बढ़ती लागत और किराये में लगातार बढ़ोतरी के बीच सरकार की यह पहल कम आय वाले परिवारों और प्रवासी कामगारों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है। खासकर उन लोगों को इससे फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें रोजगार के लिए शहरों में रहना पड़ता है, लेकिन महंगे मकानों का किराया उनके बजट पर भारी पड़ता है।
सरकार की इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे लोगों को सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराना है, जिनके लिए फिलहाल घर खरीदना संभव नहीं है।








