नई दिल्ली : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी) 2026 के प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पूरक आरोपपत्र दाखिल कर एक और व्यक्ति को आरोपी बनाया है। इसके साथ ही मामले में आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर 14 हो गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ आरोप लगाने योग्य साक्ष्य नहीं मिले हैं।
सीबीआई ने इससे पहले 28 जुलाई 2026 को 13 आरोपियों के खिलाफ पहला आरोपपत्र दाखिल किया था। मामले की जांच के दौरान परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से जुड़े सवालों के कथित तौर पर अभ्यर्थियों तक पहुंचने और इसके बदले धन लेने के आरोप सामने आए थे। जांच एजेंसी ने कथित प्रश्नपत्र लीक में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल की।
परीक्षा की पारदर्शिता पर उठे सवाल
नीट यूजी 2026 की परीक्षा तीन मई को आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद वास्तविक प्रश्नपत्र और कथित अनुमानित प्रश्नपत्र के सवालों में समानता को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस संबंध में कम से कम 120 सवालों के मेल का दावा किया गया था। इसके बाद परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों ने सवाल उठाए थे।
विवाद बढ़ने के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने की घोषणा की थी। इस फैसले से चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों की आगे की प्रक्रिया प्रभावित हुई थी।
सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच
मामले में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और सरकारी अधिकारियों की संभावित भूमिका को लेकर भी जांच की गई। सीबीआई के अनुसार, जांच के दौरान किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ आरोप लगाने योग्य साक्ष्य नहीं मिले। पूरक आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अब मामले में आगे की कार्रवाई न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार होगी।
नीट यूजी देशभर के चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाने वाली प्रमुख परीक्षा है। ऐसे में प्रश्नपत्र लीक के आरोपों ने परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा की थी।








