पीओके संकट के बीच पाकिस्तान का बड़ा फैसला, गिलगित-बाल्टिस्तान पर शुरू हुई प्रक्रिया

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डेस्क : पाकिस्तान सरकार गिलगित-बाल्टिस्तान को देश का पांचवां प्रांत बनाने की दिशा में आगे बढ़ती नजर आ रही है। क्षेत्र को संवैधानिक दर्जा देने और राजनीतिक अधिकारों के विस्तार को लेकर गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव को आगे की कार्रवाई के लिए पाकिस्तान सरकार और संसद के पास भेजा गया है।

यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में असंतोष और विरोध प्रदर्शनों की खबरें सामने आ रही हैं। वहीं बलूचिस्तान सहित कई क्षेत्रों में बढ़ती राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों के बीच पाकिस्तान सरकार पर दबाव बढ़ा हुआ है।

गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा के प्रस्ताव में क्षेत्र को पूर्ण प्रांतीय दर्जा देने, पाकिस्तान की संसद में प्रतिनिधित्व देने और संवैधानिक संस्थाओं में भागीदारी का अधिकार देने की मांग की गई है। हालांकि, इसके लिए पाकिस्तान के संविधान में संशोधन की आवश्यकता पड़ सकती है।

पहले भी उठ चुका है प्रांत बनाने का मुद्दा

गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांत का दर्जा देने की मांग नई नहीं है। इससे पहले भी पाकिस्तान सरकार इस दिशा में कदम उठाने की कोशिश कर चुकी है, लेकिन राजनीतिक और संवैधानिक विवादों के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया था। अब एक बार फिर इस मुद्दे को सक्रिय किया गया है।

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र

गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम क्षेत्र माना जाता है। यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का महत्वपूर्ण हिस्सा है और चीन के साथ संपर्क के लिहाज से इसकी अहम भूमिका है। पाकिस्तान सरकार का तर्क है कि प्रांतीय दर्जा मिलने से क्षेत्र के लोगों को अधिक अधिकार और विकास के अवसर मिलेंगे।

भारत ने जताया है विरोध

भारत लगातार यह कहता रहा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान सहित पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। भारत पाकिस्तान द्वारा इस क्षेत्र की स्थिति में किए जाने वाले किसी भी एकतरफा बदलाव को स्वीकार नहीं करता है।

गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांत का दर्जा देने की पाकिस्तान की पहल आने वाले दिनों में क्षेत्रीय राजनीति और भारत-पाकिस्तान संबंधों के बीच एक नया मुद्दा बन सकती है।