‘पहले ही खत्म कर देनी चाहिए थी सिंधु जल संधि’, क्वात्रा ने गिनाईं पाकिस्तान की करतूतें

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डेस्क : अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने दशकों तक संधि की मूल भावना यानी सद्भावना और मित्रता को अपने आचरण से खत्म किया। ऐसे में भारत का संधि को स्थगित रखना किसी नई स्थिति को पैदा करना नहीं, बल्कि पहले से बिगड़ चुके संबंधों की वास्तविकता को स्वीकार करना है।

क्वात्रा ने यह बात न्यूजवीक में प्रकाशित अपने लेख में कही। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान द्विपक्षीय मुद्दों पर भारत का सहयोग चाहता है तो उसे सबसे पहले अपने यहां तैयार किए गए आतंकी ढांचे को खत्म करना होगा। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद और भारत के खिलाफ पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे रवैये को दोनों देशों के बीच भरोसा कमजोर होने की प्रमुख वजह बताया।

‘पाकिस्तान ने आधी सदी में सद्भावना खत्म की’

क्वात्रा ने कहा कि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि सद्भावना और मित्रता की भावना के साथ हुई थी। भारत ने संधि का पूरी निष्ठा से पालन किया, लेकिन पाकिस्तान ने पिछले करीब पांच दशकों में अपने व्यवहार से इस भावना को लगातार कमजोर किया।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने 1965, 1971 और 1999 में भारत के खिलाफ युद्ध किए। इसके अलावा सीमा पार आतंकवाद और कई बड़े आतंकी हमलों ने दोनों देशों के रिश्तों को लगातार प्रभावित किया। क्वात्रा ने संसद हमले, मुंबई हमले, पठानकोट-उरी, पुलवामा और पहलगाम आतंकी हमलों का भी उल्लेख किया।

भारत की परियोजनाओं में अड़चन का आरोप

भारतीय राजदूत ने आरोप लगाया कि सिंधु जल संधि के तहत भारत की ओर से शुरू की गई परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान का रवैया लगातार बाधा डालने और नौकरशाही स्तर पर देरी करने वाला रहा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने बदलती तकनीकी परिस्थितियों के अनुरूप संधि में संशोधन के भारत के प्रयासों को भी बाधित किया।

क्वात्रा के मुताबिक, इस रवैये के कारण भारत का यह भरोसा धीरे-धीरे खत्म हुआ कि वह संधि के तहत अपने वैध अधिकारों का पूरी तरह इस्तेमाल कर सकेगा और बदलते समय के अनुरूप इसमें सुधार किया जा सकेगा।

‘आतंक और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते’

क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुख का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘आतंक और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते तथा पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।’

उन्होंने पाकिस्तान के जल संकट को लेकर भी कहा कि इस्लामाबाद को भारत पर आरोप लगाने और धमकियां देने के बजाय अपने जल प्रबंधन और जल उत्पादकता में सुधार पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की हर आंतरिक विफलता का ठीकरा भारत पर फोड़ने की आदत पुरानी हो चुकी है।