डेस्क : कांग्रेस में बड़े संगठनात्मक फेरबदल की तैयारी तेज हो गई है। पार्टी नेतृत्व ने नए चेहरों को जिम्मेदारी देने और मौजूदा पदाधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी क्रम में पिछले एक सप्ताह में करीब 130 नेताओं के साक्षात्कार लिए गए हैं। इन साक्षात्कारों में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल शामिल रहे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मौजूदा एआईसीसी सचिवों में से करीब 50 प्रतिशत को उनकी वर्तमान जिम्मेदारियों से मुक्त किया जा सकता है। कांग्रेस में फिलहाल 64 एआईसीसी सचिव हैं, जिन्हें अलग-अलग राज्यों और संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें से कई सचिव राज्यों में पार्टी संगठन की गतिविधियों की निगरानी करते हैं।
कामकाज और प्रदर्शन पर हुए सवाल
नए सचिवों के चयन के लिए साक्षात्कार की प्रक्रिया सात सितंबर से शुरू हुई थी। उम्मीदवारों से उनके संगठनात्मक अनुभव, पार्टी में योगदान और अब तक किए गए कार्यों के बारे में विस्तार से सवाल किए गए। नेताओं से यह भी पूछा गया कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी के दौरान कौन-कौन से महत्वपूर्ण काम किए और किन क्षेत्रों में उनसे कमी रह गई।
साक्षात्कार 12 से 14 नेताओं के समूह में किए गए। उम्मीदवारों को पहले अपना संक्षिप्त परिचय देने के लिए कहा गया और इसके बाद उनके राजनीतिक अनुभव तथा संगठनात्मक क्षमता का आकलन किया गया।
कमजोर राज्यों में संगठन मजबूत करने पर जोर
साक्षात्कार के दौरान नेताओं से यह भी पूछा गया कि यदि उन्हें ऐसे राज्य की जिम्मेदारी दी जाए, जहां कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा है या आगामी चुनाव होने वाले हैं, तो वे पार्टी को मजबूत करने के लिए क्या रणनीति अपनाएंगे। संभावित परिस्थितियों को सामने रखकर भी उम्मीदवारों की संगठनात्मक समझ और निर्णय लेने की क्षमता परखी गई।
इसके अलावा कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ को लेकर भी उम्मीदवारों से सवाल किए गए। पार्टी देशभर में संगठन में बदलाव और नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की कवायद कर रही है।
मौजूदा सचिवों की भी होगी समीक्षा
कांग्रेस नेतृत्व मंगलवार को मौजूदा एआईसीसी सचिवों के साथ बैठक करने वाला है। इसमें उनके कामकाज की समीक्षा और संगठन में प्रस्तावित बदलावों पर चर्चा होने की संभावना है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में नई जिम्मेदारियां पाने वाले कुछ नेताओं को भी संगठनात्मक फेरबदल में विशेष महत्व दिया जा सकता है।
कांग्रेस का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब पार्टी राज्यों में अपने संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों के लिए जमीनी स्तर पर तैयारियां बढ़ाने पर जोर दे रही है। माना जा रहा है कि प्रस्तावित बदलाव के बाद संगठन में नए चेहरों और सक्रिय नेताओं को अधिक जिम्मेदारी मिल सकती है।








