रामपुर से दिल्ली तक आजम खान की सियासी लड़ाई, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी

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डेस्क : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से जुड़े मामलों को लेकर सियासी हलचल अब दिल्ली तक पहुंचती दिखाई दे रही है। आजम खान समर्थकों की ओर से रविवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन घंटे के प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्ट के अनुसार, प्रदर्शन सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे तक प्रस्तावित है। हालांकि, वायरल पोस्ट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सोशल मीडिया पर जारी अपील में समर्थकों से जंतर-मंतर पहुंचने का आग्रह किया गया है। प्रदर्शन को न्याय, अधिकार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों की आवाज बताया गया है। आजम खान और अब्दुल्ला आजम से जुड़े कुछ सोशल मीडिया अकाउंट तथा समर्थकों की ओर से भी प्रदर्शन को लेकर पोस्ट साझा की गई हैं।

जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई बना सियासी मुद्दा

रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद के केंद्र में है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी परिसर में बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था। हालांकि, मंडलायुक्त ने इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसके बाद यूनिवर्सिटी को फिलहाल राहत मिली है।

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के विरोध में यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं की ओर से धरना-प्रदर्शन भी किया गया था। समाजवादी पार्टी ने भी इस मामले को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। अब इस मुद्दे को दिल्ली के जंतर-मंतर तक ले जाने की तैयारी को आजम खान के समर्थन में राजनीतिक लामबंदी के तौर पर देखा जा रहा है।

आजम और अब्दुल्ला की कानूनी मुश्किलें जारी

आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम दो जन्म प्रमाण पत्र और दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। इस मामले में दोनों को दोषी ठहराया जा चुका है। मामले से जुड़ी पुनरीक्षण याचिकाओं की सुनवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान के अलग होने के बाद दोनों मामलों को नई पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा गया है।

रामपुर से दिल्ली तक सियासी लड़ाई

जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खान से जुड़े मामलों को लेकर समाजवादी पार्टी लगातार सरकार पर राजनीतिक कार्रवाई का आरोप लगाती रही है। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है।

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के जरिए आजम खान समर्थक अब इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजधानी में उठाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में रविवार का प्रदर्शन उत्तर प्रदेश की सियासत में नई राजनीतिक बहस को जन्म दे सकता है।